Kaal Sarp Dosh: धनवान से फकीर बना सकता है कुंडली में लगा यह दोष, जानें कैसे पाएं छुटकारा
ज्योतिष शास्त्र में राहु और केतु को छाया या मायावी ग्रह माना गया है। इन ग्रहों की शुभ दृष्टि जहां व्यक्ति को ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है, वहीं इनकी अशु ...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 02 Jan 2026 09:33:56 AM (IST)Updated Date: Fri, 02 Jan 2026 09:33:56 AM (IST)
धनवान से फकीर बना सकता है कुंडली में लगा यह दोष।धर्म डेस्क। ज्योतिष के अनुसार, राहु और केतु ऐसे ग्रह हैं जिनका कोई भौतिक स्वरूप नहीं होता, लेकिन इनका प्रभाव बेहद गहरा माना जाता है। जब ये ग्रह अनुकूल होते हैं, तो व्यक्ति को धन, पद और प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है। लेकिन जब इनकी कुदृष्टि पड़ती है, तो जीवन में संघर्ष, असफलता और मानसिक तनाव बढ़ जाता है।
कुंडली में जब सभी ग्रह राहु और केतु के बीच आ जाते हैं, तो कालसर्प दोष बनता है। इसके भी कई प्रकार होते हैं, जिनमें घातक कालसर्प दोष को सबसे गंभीर माना गया है।
कब बनता है घातक कालसर्प दोष?
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, जब कुंडली के दसवें भाव में राहु और चौथे भाव में केतु स्थित हों, और बाकी सभी ग्रह इन दोनों के बीच आ जाएं, तो घातक कालसर्प दोष बनता है। यह स्थिति जातक के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण मानी जाती है। ऐसे योग में विशेषज्ञ ज्योतिषीय परामर्श लेना आवश्यक होता है।
घातक कालसर्प दोष के दुष्प्रभाव
- इस दोष के प्रभाव से व्यक्ति को जीवन के कई क्षेत्रों में संघर्ष झेलना पड़ता है।
- शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है
- आर्थिक स्थिति कमजोर होने लगती है
- करियर और व्यापार में बार-बार बाधाएं आती हैं
- विवाह में देरी या वैवाहिक जीवन में तनाव रहता है
- मेहनत के बावजूद सफलता देर से मिलती है
- कई बार व्यक्ति अचानक ऊंचाई से गिरावट का अनुभव करता है, जिससे आत्मविश्वास भी डगमगाने लगता है।
घातक कालसर्प दोष से मुक्ति के उपाय
- घातक कालसर्प दोष का प्रभाव कम करने के लिए धार्मिक उपायों को बेहद असरदार माना गया है।
- नियमित रूप से भगवान शिव की पूजा करें
- त्रयोदशी या अमावस्या के दिन विशेष निवारण पूजा कराएं
- प्रतिदिन गंगाजल में काले तिल मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करें
- सुबह और शाम हनुमान चालीसा का पाठ करें
- गंभीर स्थिति में किसी अनुभवी ज्योतिषाचार्य से विधिवत दोष निवारण करवाएं
इन उपायों को श्रद्धा और नियमितता के साथ करने से दोष का प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव दिखाई देने लगते हैं।