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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 16, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Santoshi Mata Vrat: संतोषी माता व्रत कब शुरू करना चाहिए, जानिए पूजा विधि और नियम

Santoshi Mata Vrat: मान्यता है कि माता संतोषी की पूजा करने से जीवन में संतोष का प्रवाह होता है। साथ ही धन और वैवाहिक समस्याएं दूर होती है। हालांकि संत...और पढ़ें

By Kushagra ValuskarEdited By: Kushagra Valuskar
Publish Date: Wed, 16 Nov 2022 08:58:59 AM (IST)Updated Date: Wed, 16 Nov 2022 08:58:59 AM (IST)
Santoshi Mata Vrat: संतोषी माता व्रत कब शुरू करना चाहिए, जानिए पूजा विधि और नियम
Santoshi Mata Vrat: मान्यता है कि माता संतोषी की पूजा करने से जीवन में संतोष का प्रवाह होता है। साथ ही धन और वैवाहिक समस्याएं दूर होती है। हालांकि संतोषी माता व्रत का करने के लिए कई नियम हैं, जिनका पालन करना चाहिए।

Santoshi Mata Vrat: शुक्रवार का दिन मां दुर्गा, माता लक्ष्मी और माता संतोषी को समर्पित है, जो लोग 16वें शुक्रवार तक संतोषी माता का व्रत विधि-विधान से करते हैं। देवी माता उनके जीवन में धन और सुख की वर्षा करती हैं। माता उनकी सभी समस्याओं को दूर करती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार माता संतोषी भगवान गणेश की पुत्री है। मान्यता है कि माता संतोषी की पूजा करने से जीवन में संतोष का प्रवाह होता है। साथ ही धन और वैवाहिक समस्याएं दूर होती है। हालांकि संतोषी माता व्रत का करने के लिए कई नियम हैं, जिनका पालन करना चाहिए।

व्रत कब से शुरू करें

व्रत शुक्ल पक्ष के पहले शुक्रवार से शुरू होता है। ध्यान रहे कि पितृ पक्ष में व्रत शुरू नहीं करना चाहिए।

संतोषी माता व्रत पूजा विधि

- शुक्रवार के ब्रह्म मुहूर्त में सुबह उठकर स्नान करें। पूजा में चित्र और कलश रखकर माता संतोषी की पूजा करनी चाहिए।

- पूजा में माता को गुड़, चना, कमल, पुष्प, दूर्वा, अक्षत और नारियल का भोग लगाएं।

- आरती करें और प्रसाद को वितरण करें। शाम को फिर आरती करने के बाद व्रत तोड़ना चाहिए।

- इस दिन भोजन दान करें और जरूरतमंद लोगों की मदद करें।

इन नियमों का पालन करें

- नियमानुसार व्रत करना ही काफी नहीं है। व्रत पूर्ण होने के बाद ध्यान करें अन्यता व्रत का पूर्ण फल नहीं मिलता है।

- संतोषी माता के व्रत के दौरान कभी खट्टा खाना न खाएं।

- व्रत करने वाले जातक को पूजा के बाद गुड़ और चने का प्रसाद खाना चाहिए।

डिसक्लेमर

'इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।'