नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर, Sawan 2025 Special : जबलपुर के कॉलेज ऑफ मटेरियल मैनेजमेंट (सीएमएम) के आर्मी ऑर्डिनेंस कॉर्प्स (एओसी) संग्रहालय में एक ऐसी तोप है, जिसमें शिवलिंग बना हुआ है। यह तोप 1610 में बनी थी, और इसका वजन लगभग 410 किलो है। यह तोप कांसे से बनी है और चार फीट लंबी है।
जब इस तोप से निशाना लगाया जाता है, तो निशाना साधने वाले को शिवलिंग के दर्शन होते हैं। यह तोप सीएमएम संग्रहालय में मौजूद कई पुरानी तोपों में से एक है, जिन्हें बहुत सहेज कर रखा गया है। संग्रहालय में ऐसी 2000 से ज्यादा ऐतिहासिक वस्तुएं मौजूद हैं, जिनका रोचक इतिहास है। हर तोप के पीछे एक अलग कहानी है, और यह शिवलिंग वाली तोप भी अपने आप में अनोखी है।
सीएमएम के मेजर राज विर्क ने बताया कि सेना के संग्रहालय में ऐसी कई अनोखी तोपें मौजूद हैं, जिनमें से सबसे खास है किंग ऑफ पर्शिया तोप। यहां मैदान में सीना ताने खड़ीं इन दो बड़ी-बड़ी कांसे की तोपों में से हर एक का वजन 10 क्विंटल से ज्यादा है।
ये चमचमाती तोपें अंग्रेजों के तोपखाने में थीं, जो अब सेना के संरक्षण में हैं। कांसे से ढाल कर बनाई गई इस तोप में किसी लंबी गन की तरह टारगेट प्वांइट दिया हुआ है। यही इस तोप का सबसे खास हिस्सा है। टारगेट प्वाइंट के बीच इसके ऊपर शिवलिंग की आकृति और पीछे दो शेर बने हुए हैं। तोप के ऊपर संस्कृत में श्लोक भी लिखा है।
तोप राज गज सिंह की हुआ करती थी। छोटी तोप होने की वजह से युद्ध के दौरान सैनिक इसे आसानी से एक-स्थान से दूसरे ले जाते थे। बाद में ये तोप अंग्रेजों के हाथ लगी। इसके बाद अंग्रेजों ने इसे संभाल कर रख दिया था। इन्हें अंग्रेजों ने एक डच कंपनी के जहाज से बरामद किया था।
उस जमाने मे ज्यादातर लड़ाइयां आमने-सामने की होती थीं और उनमें तलवार, भाला, धनुष और तीर जैसे हथियारों का इस्तेमाल किया जाता था। बंदूकें नई-नई चली थीं और तोप केवल राजा के पास ही होती थी, और राजा का यह हथियार चर्चा का विषय भी होता था। लोग इसे देखने के लिए भी आते थे।