Shattila Ekadashi 2026: 14 जनवरी को करें तिल के ये उपाय, दूर होंगे पाप, चमकेगा भाग्य
शास्त्रों के अनुसार, एक ब्राह्मणी ने जीवन में बहुत दान-पुण्य किया, लेकिन कभी अन्न का दान नहीं किया। भगवान विष्णु भिक्षु रूप में उसके पास आए, तब उसने अ ...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 04 Jan 2026 03:48:08 PM (IST)Updated Date: Sun, 04 Jan 2026 03:48:08 PM (IST)
Shattila Ekadashi 2026: षटतिला एकादशी व्रत 14 जनवरी 2026 को होगा, जानें पूजा विधिHighLights
- तिल का छह प्रकार से प्रयोग अत्यंत शुभ
- भगवान विष्णु की विशेष पूजा का विधान
- पितृ दोष और पापों से मुक्ति की मान्यता
धर्म डेस्क: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को विशेष पुण्यदायी माना गया है। माघ मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली षटतिला एकादशी (Shattila Ekadashi 2026) का उल्लेख शास्त्रों में अत्यंत फलदायी व्रत के रूप में किया गया है। वैदिक पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में षटतिला एकादशी का व्रत 14 जनवरी को रखा जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ-साथ तिल का विशेष महत्व बताया गया है।
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मान्यता है कि इस दिन तिल का छह प्रकार से प्रयोग करने से व्यक्ति जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्त होता है और उसे वैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि इस एकादशी को मोक्षदायिनी भी कहा जाता है।
Shattila Ekadashi 2026: क्यों खास है यह व्रत?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, षटतिला एकादशी का संबंध दान, तप और आत्मशुद्धि से है। इस दिन विशेष रूप से तिल से जुड़े कार्य किए जाते हैं, जिन्हें अत्यंत शुभ माना गया है। तिल को शुद्धि, पितृ तृप्ति और नकारात्मक ऊर्जा नाश का प्रतीक माना जाता है।
षटतिला एकादशी 2026 के उपाय (Shattila Ekadashi Remedies)
- तिल स्नान: स्नान के जल में काले तिल मिलाकर स्नान करें, इससे शारीरिक और मानसिक शुद्धि होती है।
- तिल का उबटन: स्नान से पहले तिल का उबटन लगाने से स्वास्थ्य लाभ और ग्रह दोष शांति मानी जाती है।
- तिल का तर्पण: पितरों की शांति के लिए तिल मिले जल से तर्पण करें।
- तिल का हवन: भगवान विष्णु की पूजा में हवन कुंड में काले तिल की आहुति दें।
- तिल का दान: तिल और तिल से बनी मिठाइयों का दान महादान कहा गया है।
- तिल से पारण: व्रत खोलते समय फलाहार में तिल का सेवन शुभ माना जाता है।
Shattila Ekadashi 2026: पूजा विधि
- प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
- भगवान विष्णु के समक्ष जल लेकर व्रत का संकल्प लें।
- पीले पुष्प, तुलसी दल, धूप और दीप अर्पित करें।
- भगवान को तिल से बनी मिठाई का भोग लगाएं।
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
- एकादशी की रात जागरण कर भजन-कीर्तन करें।
षटतिला एकादशी 2026 का व्रत 14 जनवरी को रखा जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और तिल के छह प्रकार से प्रयोग का विधान है। मान्यता है कि यह व्रत पापों से मुक्ति, पितृ शांति और वैकुंठ धाम की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है।
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। नईदुनिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। नईदुनिया अंधविश्वास के खिलाफ है।