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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 06, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

मिलता है शिव भक्तों को ये प्रसाद

इस माह में शिवभक्त उन्हें प्रसन्न करने के लिए जप-तप-व्रत तीनों करते हैं। तप यानी तपस्या तो प्राचीन काल अधिक होती थी।

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Publish Date: Thu, 06 Aug 2015 09:41:00 AM (IST)Updated Date: Sat, 08 Aug 2015 02:35:55 PM (IST)
मिलता है शिव भक्तों को ये प्रसाद

देवों के देव महादेव का प्रिय माह यानी श्रावण माह जारी है। इस माह में शिवभक्त उन्हें प्रसन्न करने के लिए जप-तप-व्रत तीनों करते हैं। तप यानी तपस्या तो प्राचीन काल अधिक होती थी।

आज भी कुछ भक्त इसे करते हैं, हर शिवभक्त तप तो नहीं लेकिन जप और व्रत करते हैं। लेकिन शिवभक्तों को प्रसाद रूपी आशीर्वाद मिलता है और उनकी मनोकामना पूरी होती है।

यदि कोई शिवभक्त भगवान शिव की आराधना सच्चे मन से करता है तो उसे कई तरह की सिद्धियां प्राप्त होती हैं। ऐसी ही सिद्धियां गणेशजी, हनुमानजी, नंदी और कच्छप के पास भी हैं।

प्रथम पूज्य गणेश: भगवान गणेश प्रथम पूज्य हैं। गणेश जी के हाथ में अंकुश है जो संयम की चेतावनी देता है। कमल, निर्लेप पवित्रता का, पुस्तक उच्च उदार विचारधारा का और मोदक मधुर स्वभाव का प्रतीक है।

वे मूषक जैसे छोटे जीव को भी प्रेम से अपनाते हैं। जो भी शिवत्व की ओर बढ़ना चाहता है उसे कसौटी पर कसने के लिए द्वारपाल के रूप में गणेश जी उपस्थित हैं।

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हनुमानजी: श्रीरामभक्त हनुमानजी का आदर्श है सेवा और संयम। ब्रह्मचर्य उनके जीवन का मूल सिद्धांत है। वे सदैव श्रीराम के सहयोगी रहे हैं। ऐसी तत्परता और सेवा भाव से ही शिवत्व की पात्रता मिलती है। अगर इनकी दिव्यता जीवन में न आई तो शिवमय आत्मा का साक्षात्कार नहीं हो सकेगा।

नंदी: शिव के साकार रूप महादेव का वाहन है नंदी, यह सामान्य बैल नहीं यह पूर्ण ब्रह्मचर्य का प्रतीक है। महादेव वाहन नंदी वैसा ही है जैसे हमारी आत्मा का वाहन शरीर है। परमेश्वर शिव आत्मा हैं और नंदी शरीर।


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विष्णु स्वरूप कच्छप: भगवान विष्णु के कच्छप अवतार में परमेश्वर शिव कि सेवा में सदैव लीन रहते हैं। शास्त्रों में कच्छप को मस्तिष्क का प्रतीक माना गया है। कच्छप कभी भी नंदी की ओर जाते हुए दिखाई नहीं देते, अपितु नंदी और कच्छप दोनों ही शिव की ओर बढ़ते दिखाई देते हैं।