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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 06, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

साम्प्रदायिक सद्भाव का प्रतीक है झारखंडी शिवलिंग

गोरखपुर से 25 किमी दूर खजनी कस्बा, यहां है वो प्रसिद्ध गांव सरया तिवारी जहां भगवान शिव का अनोखा शिवलिंग है।

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Publish Date: Sat, 06 Jun 2015 04:29:42 PM (IST)Updated Date: Wed, 10 Jun 2015 01:15:49 PM (IST)
साम्प्रदायिक सद्भाव का प्रतीक है झारखंडी शिवलिंग

उत्तरप्रदेश के गोरखपुर से 25 किमी दूर है खजनी कस्बा और यहां है वो प्रसिद्ध गांव सरया तिवारी जहां भगवान शिव का अनोखा शिवलिंग है। जिसे 'झारखंडी शिवलिंग' भी कहा जाता है।

कहते हैं यह शिवलिंग सैकड़ों वर्ष पुराना है और यहां पर स्वयं भगवान शिव आए थे। यह शिवलिंग हिंदुओं के साथ मुस्लिमों के लिए भी उतना ही पूजनीय है क्योंकि इस शिवलिंग पर एक कलमा (इस्लाम धर्म का एक पवित्र वाक्य) अंकित है।

लोकमान्यता है कि महमूद गजनवी ने इस शिवलिंग को तोडऩे की कोशिश की, लेकिन वह सफल नहीं हो पाया। इसके बाद उसने इस पर उर्दू में कलमा लिखवा दिया ताकि हिंदू इसकी पूजा नहीं करें।

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लेकिन इसके विपरीत आज इस शिवलिंग की महत्ता और बढ़ गई वर्तमान में यहां कई भक्त यहां आते हैं। यह मंदिर साम्प्रदायिक सद्भाव का प्रतीक है। क्योंकि हिन्दुओं के साथ-साथ रमजान में मुस्लिम भी यहां पर आकर अल्लाह की इबादत करते है।