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दिल्ली से 160 KM दूर भगवान कल्कि का घर, इस जगह लेंगे जन्म, जानें क्या है भगवान के माता-पिता का नाम

उत्तर प्रदेश के संभल जिले के ऐंचोड़ा कंबोह में भगवान विष्णु के 10वें 'कल्कि अवतार' को समर्पित भव्य 'श्री कल्कि धाम' का निर्माण हो रहा है। दिल्ली से मा...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Akriti kumari
Publish Date: Thu, 08 Oct 2026 04:52:19 PM (IST)Updated Date: Thu, 08 Oct 2026 04:52:19 PM (IST)
दिल्ली से 160 KM दूर भगवान कल्कि का घर, इस जगह लेंगे जन्म, जानें क्या है भगवान के माता-पिता का नाम
संभल के ऐंचोड़ा कंबोह में निर्माण

HighLights

  1. दिल्ली से 160 किमी दूर कल्कि धाम
  2. संभल के ऐंचोड़ा कंबोह में निर्माण
  3. अनावतारित देव का पहला मंदिर

धर्म डेस्क। सनातन धर्म-शास्त्रों और पंचांगीय परंपरा के अनुसार, आश्विन कृष्ण त्रयोदशी के आसपास ही भगवान श्री कृष्ण देह त्यागकर बैकुंठ धाम लौटे थे, जिससे द्वापर युग का अंत और कलयुग का प्रारंभ हुआ था। इस विशेष तिथि को धार्मिक मान्यताओं में कलयुग दिवस के रूप में देखा जाता है।

श्रीमद्भागवत पुराण और कल्कि पुराण के अनुसार, कलयुग के अंत में धर्म की स्थापना और पाप के विनाश के लिए भगवान श्रीहरि विष्णु अपना 10वां अवतार 'कल्कि अवतार' के रूप में लेंगे। पुराणों में इस पावन स्थान का नाम संभल (शंभल) बताया गया है, जिसकी पहचान वर्तमान उत्तर प्रदेश के संभल जिले में स्थित ऐंचोड़ा कंबोह के रूप में हो चुकी है।


आइए जानते हैं राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से इस स्थान की दूरी, 'श्री कल्कि धाम' की विशेषता और भगवान कल्कि के अवतार से जुड़ी पौराणिक कथाएं-

दिल्ली से केवल 160 किमी दूर स्थित है अवतरण स्थल

  • भौगोलिक स्थिति: श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार, कल्कि अवतार गंगा और रामगंगा नदियों के मध्य स्थित संभल क्षेत्र में होगा।
  • सटीक स्थान: उत्तर प्रदेश के संभल जिले में असमोली विकास खंड के ऐंचोड़ा कंबोह थाना क्षेत्र के तहत ऐंचोड़ा कंबोह गांव को इस अवतार का जन्मस्थान माना गया है।
  • दूरी: यह स्थान संभल मुख्य शहर से लगभग 16 किलोमीटर तथा दिल्ली से मात्र 160 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

'श्री कल्कि धाम' की 2 अनूठी विशेषताएं

ऐंचोड़ा कंबोह गांव में भव्य 'श्री कल्कि धाम मंदिर' का निर्माण हो रहा है, जो पूरे विश्व में अपने आप में अनोखा है-

  • अनावतारित देव का मंदिर: यह विश्व का पहला ऐसा धाम है जो भगवान के उस अवतार को समर्पित है, जिनका अभी प्राकट्य (अवतार) होना बाकी है।
  • शास्त्रोक्त जन्मस्थान: मंदिर का निर्माण ठीक उसी पवित्र भूमि पर किया जा रहा है, जिसका उल्लेख पुराणों में भगवान कल्कि के जन्मस्थान के रूप में हुआ है।

किस तपस्वी परिवार में लेंगे जन्म?

धर्म-ग्रंथों के अनुसार, भगवान कल्कि संभल के एक परम तपस्वी और निष्ठावान ब्राह्मण परिवार में जन्म लेंगे-

  • पिता का नाम: विष्णुयश (भगवान विष्णु के गुणों के यशगान करने वाले निष्ठावान ब्राह्मण)।
  • माता का नाम: सुमति।

कब होगा कल्कि अवतार?

कल्कि पुराण और भविष्य मालिका पुराण के अनुसार, भगवान का यह अवतार कलयुग और सतयुग के संधिकाल (कलयुग के अंतिम चरण) में होगा।

  • कलयुग की कुल अवधि: सनातन काल-चक्र के अनुसार कलयुग की कुल आयु 4,32,000 वर्ष है।
  • वर्तमान स्थिति: कलयुग के अभी लगभग 5,000 वर्ष ही व्यतीत हुए हैं। इस गणना के अनुसार कलयुग के अंत में अभी 4 लाख 26 हजार से अधिक वर्षों का समय शेष है।

भगवान कल्कि का रूप, अस्त्र, वाहन और विवाह

  • दिव्य स्वरूप व वाहन: भगवान कल्कि अत्यंत कांतिवान, बलिष्ठ और तेजस्वी स्वरूप वाले होंगे। वे 'देवदत्त' नाम के सफेद अश्व (घोड़े) पर सवार होकर एक हाथ में चमकती हुई दिव्य खड्ग (तलवार) धारण करेंगे।
  • अधर्म का नाश: भगवान कल्कि अपनी दिव्य तलवार से पृथ्वी से समस्त आततायियों, अधर्मियों और पापियों का संहार करेंगे तथा केवल सत्यमार्गी व भक्ति भाव वाले लोगों की रक्षा करेंगे।
  • विवाह: पुराणों के अनुसार, भगवान कल्कि का विवाह सिंहल द्वीप की राजकुमारी पद्मा से होगा, जिन्हें साक्षात माता लक्ष्मी का अवतार माना गया है।
  • अवतार की आयु: भविष्य मालिका और अन्य ग्रंथों में उल्लेख है कि भगवान कल्कि लगभग 23 वर्षों तक अपनी लीलाएं दिखाएंगे और अधर्म का संपूर्ण विनाश कर पृथ्वी पर पुनः सत्ययुग (स्वर्ण काल) की स्थापना करेंगे।