
कथा सार : इस पौराणिक कथा में गणेश जी ने कुबेर को दया और प्रेम का पाठ पढ़ाया है। जिसका उल्लेख हमारे पौराणिक धर्म ग्रंथों में मिलता है।
हिंदू पौराणिक धर्मग्रंथों के अनुसार कुबेर धन के देवता माने गए हैं। कुबेर की पूजा करने से समृद्धि और धन की प्राप्ति होती है। कुबेर के अलावा धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा करने पर भी सुख-संपत्ति धन की प्राप्ति होती है।
शक्ति और पैसा आने पर अमूमन भ्रष्टाचार आता है। यह लोगों में अहंकार पैदा करता है। ठीक इसी तरह एक बार कुबेर को अपने अकूत धन का अहंकार हो गया।
कुबेर को अपना अकूत धन देखकर इतना बैचेन रहने लगे। उनकी ख्वाहिश थी वह सभी को अपना धन दिखाएं। इसलिए उन्होंने निर्णय लिया कि वह एक विशाल भोज समारोह आयोजित करेंगे।
जहां भोजन में कई तरह के पकवान होंगे। उन्होंने हजारों गणमान्य देवताओं को आमंत्रित किया। वह भगवान शिव को भी आमंत्रित करने के लिए कैलाश पहुंचे।
लेकिन भगवान शिव से कुबेर का अहंकार छिप ना सका। उन्होंने कुबेर से कहा, 'वह तो उस भोज में नहीं आ सकेगें लेकिन उनके पुत्र बाल गणेश जरूर भोज समारोह में शामिल होंगे।'
विशाल भोज में सभी देवताओं को आमंत्रित कर कुबेर और भी ज्यादा अहंकारी हो गए। तय समय पर सभी अतिथि कुबेर के यहां पहुंचे। यहां बाल गणेश भी आए। सभी औपचारिकताओं को पूरा कर बाल गणेश जी को जब भोजन दिया गया तो उनके पेट में सारा भोजन गुम हो गया। उन्होंने और भोजन खाने की मंशा प्रकट की।
अभी सभी देवतागण भूखे थे। लेकिन गणेश जी ने सारा भोजन ग्रहण कर लिया। भोजन फिर से और बार-बार बना, लेकिन हर बार गणेशजी ने सारा भोजन ग्रहण कर लिया। यह देख कुबेर हैरान हो गए।
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उनके अतिथियों को भोजन नहीं मिला। इसलिए कुबेर परेशान थे। वह तुरंत भगवान शिव के पास पहुंचे। उन्होंने कहा, 'भगवन् आप बाल गणेश जी की भूख शांत कीजिए।
मेरे सारे अतिथि भूखे हैं और अन्न का भंडार खत्म हो चुका है। तब भगवान शिव ने एक मुट्ठी चावल दिए और कहा इसे बनाकर बाल गणेशजी को खिलाना उनकी भूख शांत हो जाएगी।'
कुबेर ने ऐसा ही किया। बाल गणेश जी की भूख शांत हुई तो सभी देवताओं के पेट स्वत: ही भर गए। इस तरह कुबेर का घमंड भी चूर-चूर हो गया। वह बाल गणेश के चरणों में साष्टांग दंडवत होकर प्रणाम किया और अपने अहंकार के लिए सभी से क्षमा मांगी।
बाल गणेश ने कुबेर से कहा, कुबेर आप सभी प्राणियों के प्रति अगर दया और प्रेम का भाव रखेंगे तभी उनके ह्दय में जगह बना पाएंगे।
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इसलिए अहंकार को त्याग कर देव गुण की गरिमा का भी ध्यान रखें । कुबेर अपने किए गए कृत्य पर बहुत शर्मिंदा हुए और सभी ने मिलकर श्री गणेश जी का जयकार किया।