भू वैज्ञानिकों के अनुसार आदिमानव ने आग की खोज की थी। लेकिन ग्रीक पौराणिक कथा में आग की खोज के बारे में कुछ अलग ही उल्लेख मिलता है। ग्रीक पौराणिक कथा के अनुसार, 'प्रोमेथिअस इस दंत कथा के नायक हैं, जो शापित हैं।'
एक बार ब्रह्माण्ड पर शासन करने वाले देवताओं के सर्वोच्च राजा जेअस ने विशाल देह के देव प्रोमेथिअस और एपिमेथिअस को स्वर्ग से पृथ्वी पर एक ऐसे प्राणी की रचना के लिए भेजा, जो पृथ्वी पर जीवन को गति दे सकें।
प्रोमेथिअस और एपिमेथिअस दोनों भाई थे। दोनों भाईयों ने देवताओं के राजा के आदेश पर पृथ्वी पर प्राणियों की रचना की। प्रोमेथिअस ने मानव और एपिमेथिअस ने जीव-जंतुओं को रचा। प्रोमेथिअस ने मिट्टी और पानी से मानव का रचना की। उन्होंने मानव को इस तरह तैयार किया कि वह अपना सिर उठाकर आकाश की ओर देख सकें।
वहीं, एपिमेथिअस ने जानवरों की रचना कुछ इस तरह की, कि वह पृथ्वी पर नीचे की ओर ही देख सकें। लेकिन एपिमेथिअस ने जानवरों को प्राकृतिक आपदाओं से बचने के लिए शक्तिशाली बनाया। ऐसे में प्रोमेथिअस का बनाया हुआ मानव कमजोर था।
प्रोमेथिअस इस बात को लेकर दुःखी थे और फिर एक दिन उन्हें स्वर्ग में जलती हुई आग का ध्यान आया। वह जानते थे आग वो शक्ति है जिससे मनुष्य भोजन पका सकता है। जंगली जानवरों से रक्षा कर सकता है।
इस विचार को गंभीरता से लेते हुए प्रोमेथिअस देव पुनः स्वर्ग गए और सूर्य के रथ से एक मशाल के जरिए आग चुरा लाए। प्रोमेथिअस जानते थे कि देवताओं के राजा जेअस उन्हें आग कभी भी पृथ्वी पर ले जाने नहीं देंगे।
जेअस को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने प्रोमेथिअस को सजा दी। प्रोमेथिअस को कॉकासुस पर्वत की सबसे ऊंची चट्टान से बांध दिया गया है। उन्हें जेअस ने शाप दिया कि आदमखोर बाज प्रोमेथिअस के जिगर को नोच-नोच कर खात रहेगा। और जब जिगर खत्म हो जाएगा तो फिर से नया जिगर बन जाऐगा और फिर बाज उसे अनंत काल तक खाता रहेगा।
ग्रीक पौराणिक मान्यताओं के अनुसार आज तक प्रोमेथिअस मानवजाति को सुरक्षित रखने के लिए आज तक कष्ट सह रहे हैं।