
भगवान गौतम बुद्ध के अनुसार चमत्कार तीन प्रकार के होते हैं। पहला मन की शक्ति का चमत्कार। दूसरा मन की बात जान लेने का चमत्कार और तीसरा शिक्षा का चमत्कार।
पहले चमत्कार में भिक्षु विभिन्न प्रकार के मनोबल से चमत्कार करता है। इसमें वह मन की शक्ति का उपयोग करते हुए ध्यान करता है वह स्वयं को एक से अनेक रूपों में पाता है। वह स्वयं को हवा में तैरता हुआ पाता है। वह पानी पर चलने लगता है। हवा में पंछियों की तरह उड़ने लगता है। वह अपनी काया को बदल लेता है और फिर एक हल्की आहट से पुनः अपने स्वरूप में आ जाता है। इसे ही मन की शक्ति का चमत्कार कहते हैं।
अंतर्यामी होने का चमत्कार वो होता है जिसमें कोई किसी चिन्ह द्वारा यह बता देता है कि यह तुम्हारा मन है, ऐसी तुम्हारी इच्छा है, यह तुम्हारे विचार हैं। वह जितना भी कुछ बताता है। वह यथागत होता है। यह तुम्हारा अंतर्मन है।
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अंतर्मन किसी संकेत या किसी की वाणी को सुन कर नहीं बल्कि वह ऐसे व्यक्ति के स्पष्ट कथन जो विद्वतापूर्ण तर्क करता है। उसे मानता है। अतः वह इन विषयों में तत्काल अपनी बुद्धि का प्रयोग करेगा। वह जितना कुछ भी कहता है यथासत्य होता है। इसे अंतर्यामी होने का चमत्कार कहते हैं।
शिक्षा का चमत्कार जब प्रतीत होत है जब आप तर्क करते हैं, ये इस तरह क्यों नहीं इस तरह ही क्यों। अपनी बुद्धि का इस प्रकार प्रयोग करो इस प्रकार नहीं। इस स्थिति को प्राप्त करो। इस स्थिति में निवास करो यही शिक्षा का चमत्कार है। यानी अपने बौद्धिक क्षमताओं को बढ़ाते हुए नीतिगत अपने विवेक से हल निकालना।
( संदर्भ: यह आलेख 1966 में प्रकाशित पुस्तक 'द लिविंग थॉट्स ऑफ गौतम बुद्ध' से संपादित किया गया है।)