ज्योतिष शास्त्र के जरिए व्यक्ति के जीवन से जुड़े लगभग सभी बदलाव को जाना जा सकता है। इससे व्यक्ति के अवैध संबंधों के बारे में पता लगाया जा सकता है। बताते चलें कि, मन चंद्रमा का कारक होता है और काम वासना मन में जागती है। लगन व्यक्ति स्वयं होता है, जबकि पंचम भाव प्रेमिका और सप्तम भाव पत्नी का होता है। इसी तरह शुक्र भोग विलास का कारक माना जाता है।

बताते चलें कि, शनि, राहू, मंगल और पंचम भाव, पंचमेश, द्वादश और द्वादशेष का आपस में संबंध होना जातक के विवाह पूर्व एवं पश्चात अवैध संबंध स्थापित करवाते हैं। जन्म कुंडली में सप्तम भाव पर शनि की चंद्रमा के साथ युति जहां जातक को मानसिक रूप से पीड़ित करती हैं। वहीं, प्रेम संबंध भी करवाती है। कुछ ऐसे ज्योतिषीय योग होते हैं, जिनके जन्म कुंडली में होने से जातक के अवैध संबंधों और कामुक होने का संकेत मिलता है।

शास्त्रों के अनुसार मेष या वृश्चिक राशि में मंगल के साथ शुक्र के होने के पराई स्त्री से घनिष्ठता बनती हैं। इसी तरह सूर्य और शुक्र की युति मीन लग्न में होने से जातक को अत्यंत कामुक बनाती है। इस स्थिति में व्यक्ति का अवैध संबंध बनता है तथा ऐसा जातक की कामवासना की तृप्ति शीघ्र नहीं होती।

बुध और शुक्र की युति यदि सप्तम भाव में हो तो जातक अवैध संबंध के लिए नए-नए तरीके अपनाता है। मंगल और राहू की युति अथवा दृष्टि शुक्र पर हो तो जातक कामुक होता है। इस स्थिति में अवैध संबंध बनाने के लिए उसका मन भटकता है।

लग्न में शनि का होना जातक की काम वासना बढ़ाता है। पंचम भाव में शनि होने से अपने से बड़ी स्त्रियों के प्रति अवैध संबंध बनाने के लिए जातक को आकर्षित करता है। इसी तरह राहू का अष्टम भाव में होना जातक को अवैध संबंध के लिए प्रेरित करता है।

तुला राशि में चार ग्रह एक साथ होने से जातक के परिवार में क्लेश उत्पन्न होते हैं, जिसके कारण जातक बाहर अवैध संबंध बनाता है। इतना ही नहीं सूर्य का सप्तम भाव में होना जातक वैवाहिक जीवन में कलेश उत्पन्न करता है। इससे परेशान होकर जाकत अवैध संबंध बनाता है।

Posted By: Sushma Barange