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हरसिद्धि माता मंदिर : महाकाल नगरी उज्जैन में स्थित यह शक्तिपीठ, जहां गिरी थी माता सती की दाहिनी कोहनी

51 Shakti Peeth: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहां माता सती की दाहिनी कोहनी गिरी थी।

By Digital DeskEdited By: Akash Sharma
Publish Date: Tue, 12 May 2026 03:28:26 PM (IST)Updated Date: Tue, 12 May 2026 03:28:26 PM (IST)
हरसिद्धि माता मंदिर : महाकाल नगरी उज्जैन में स्थित यह शक्तिपीठ, जहां गिरी थी माता सती की दाहिनी कोहनी
हरसिद्धि माता मंदिर में शाम होते ही जगमगाते हैं दीप स्तंभ, अद्भुत दृश्य देखने उमड़ते हैं हजारों श्रद्धालु (फाइल फोटो)

HighLights

  1. उज्जैन में स्थित हरसिद्धि माता मंदिर प्रमुख शक्तिपीठों में शामिल है
  2. मंदिर में महालक्ष्मी, महासरस्वती और अन्नपूर्णा की प्रतिमाएं स्थापित हैं
  3. शाम के समय दीप स्तंभों का दृश्य श्रद्धालुओं को आकर्षित करता।

धर्म डेस्क, नईदुनिया। देशभर में मां सती के 51 शक्तिपीठों को विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है। इन्हीं प्रमुख शक्तिपीठों में मध्यप्रदेश के उज्जैन स्थित हरसिद्धि माता मंदिर (Harsiddhi Mata Temple, Ujjain) का नाम भी शामिल है। यह मंदिर महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के समीप स्थित होने के कारण श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का केंद्र बना हुआ है।

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नवरात्रि और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर का दिव्य वातावरण और शाम के समय दीपों से सजे स्तंभ श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित करते हैं।

माता सती की कोहनी गिरने से बना शक्तिपीठ

धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब भगवान शिव माता सती के जलते हुए शरीर को लेकर ब्रह्मांड में विचरण कर रहे थे, तब उनके शरीर के अंग अलग-अलग स्थानों पर गिरे। जिन स्थानों पर ये अंग गिरे, वहां शक्तिपीठों की स्थापना हुई।


मान्यता है कि उज्जैन में जिस स्थान पर माता सती की दाहिनी कोहनी गिरी थी, वहीं हरसिद्धि माता शक्तिपीठ की स्थापना हुई। यही कारण है कि इस मंदिर को शक्ति और भक्ति का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।

मंदिर में विराजमान हैं तीन देवियां

हरसिद्धि माता मंदिर में महालक्ष्मी और महासरस्वती की प्रतिमाएं स्थापित हैं। इन दोनों मूर्तियों के मध्य मां अन्नपूर्णा की प्रतिमा विराजमान है। मंदिर परिसर में श्री यंत्र भी स्थापित किया गया है, जिसकी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। श्रद्धालु यहां सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति की कामना लेकर पहुंचते हैं। मंदिर की धार्मिक मान्यताओं और वास्तुकला के कारण भी यह स्थल विशेष महत्व रखता है।

स्कंद पुराण में मिलता है उल्लेख

स्कंद पुराण में देवी चंडी को हरसिद्धि उपाधि मिलने की कथा का वर्णन मिलता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान शिव और माता पार्वती कैलाश पर्वत पर एकांत में थे, तभी चंड और प्रचंड नामक दो राक्षस वहां पहुंचे।

भगवान शिव के आह्वान पर देवी चंडी ने दोनों राक्षसों का संहार किया। इससे प्रसन्न होकर महादेव ने देवी को ‘सब पर विजय प्राप्त करने वाली’ अर्थात ‘हरसिद्धि’ की उपाधि प्रदान की।

दीप स्तंभ बनते हैं आकर्षण का केंद्र

मंदिर का पुनर्निर्माण मराठा काल में कराया गया था। यहां स्थित दो विशाल दीप स्तंभ श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र हैं। प्रतिदिन शाम के समय इन स्तंभों पर दीप प्रज्वलित किए जाते हैं, जिससे पूरा मंदिर परिसर अलौकिक रोशनी से जगमगा उठता है। इस अद्भुत दृश्य को देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं।

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। नईदुनिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। नईदुनिया अंधविश्वास के खिलाफ है।