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दशहरे की अनूठी परंपराए: MP के मंदसौर में रावण को जमाई राजा मानकर करेंगे पूजा, धमनार में मुक्का मारकर करेंगे अंत

ऐसी प्रचलित मान्यता है कि रावण की पत्नी मंदोदरी का पीहर मंदसौर में नामदेव समाज में ही था। इसके चलते खानपुरा क्षेत्र में रावण को जमाई राजा मानकर पूजते ...और पढ़ें

By Alok SharmaEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Mon, 19 Oct 2026 07:20:49 PM (IST)Updated Date: Mon, 19 Oct 2026 07:30:14 PM (IST)
दशहरे की अनूठी परंपराए: MP के मंदसौर में रावण को जमाई राजा मानकर करेंगे पूजा, धमनार में मुक्का मारकर करेंगे अंत
मंदसौर में रावण को माना जाता है दामाद।

HighLights

  1. रावण की पत्नी मंदोदरी का पीहर मंदसौर में नामदेव समाज में ही था।
  2. इसके चलते खानपुरा क्षेत्र में रावण को जमाई राजा मानकर पूजते हैं।
  3. लक्ष्मीनारायण मंदिर से ढोल के साथ रावण प्रतिमा की पूजा-अर्चना करेंगे।

नईदुनिया प्रतिनिधि, मंदसौर। मंदसौर जिले में दशहरे पर अति प्राचीन परंपरा चली आ रही है। मंदसौर में घनी बस्ती वाले क्षेत्र खानपुरा में लगभग 450 साल पुरानी रावण की प्रतिमा को नामदेव छीपा समाज पूजा-अर्चना करेगा। 20 अक्टूबर को सुबह खानपुरा स्थित बड़े मंदिर से जुलूस के साथ रावण प्रतिमा के यहां पहुंचकर पूजा करेंगे। शाम को पटाखे की लड़ चलाकर प्रतीकात्मक वध करेंगे।

जिला मुख्यालय से 30 किमी दूर धमनार में रावण प्रतिमा के सामने राम-रावण की सेना में वाक युद्ध होगा। वहीं एक दूसरे पर जलते हुए टोपले भी फेकेंगे। राम सेना में शामिल कोई एक युवक रावण की नाक पर मुक्का मारने के बाद युद्ध का अंत हो जाएगा।


रावण की होती थी पूजा

ऐसी प्रचलित मान्यता है कि रावण की पत्नी मंदोदरी का पीहर मंदसौर में नामदेव समाज में ही था। इसके चलते खानपुरा क्षेत्र में रावण को जमाई राजा मानकर पूजते हैं।

दशहरे पर 20 अक्टूबर को सुबह 10 बजे नामदेव छीपा समाज के पुरुष व महिलाए खानपुरा स्थित बड़ा लक्ष्मीनारायण मंदिर से ढोल के साथ रावण प्रतिमा के यहां पहुंचकर पूजा-अर्चना करेंगे।

बीमारी से दूर करने की प्रार्थना

समाज के लोग रावण बाबा से पूरे क्षेत्र को बीमारी व महामारी से दूर रखने के लिए प्रार्थना करेंगे। रावण प्रतिमा के पैर में लच्छा भी बांधते हैं। शाम को गोधुलि वेला में रावण प्रतिमा की पूजा-अर्चना कर माफी मांगेंगे, प्रतीकात्मक वध करेंगे।

रावण की प्रतिमा के सामने घूंघट निकालने की प्रथा

  • रावण को जमाई राजा मानने की मान्यता के कारण ही नामदेव समाज सहित कुछ अन्य समाज की बुजुर्ग महिलाएं आज भी रावण की प्रतिमा के सामने से निकलने समय घूंघट निकालती है।
  • हालांकि इतिहासकार मंदोदरी के मंदसौर के रिश्ते के किसी भी तरह के साक्ष्य होने की बात से इंकार करते रहे हैं।
  • रावण की प्रतिमा मंदसौर में क्यों बनी इसके पीछे भी वे कोई उचित कारण नहीं बता पाते हैं।
  • बुजुर्ग मंदोदरी से शहर के रिश्ते का सबसे बड़ा प्रमाण देते हुए उल्टा प्रश्न खड़ा करते हैं कि इस शहर का नाम मंदसौर क्यों हुआ?
  • मंदोदरी के रिश्ते के कारण ही यहां का नाम मंदसौर है। हालांकि कही भी उल्लेख नहीं होने के कारण धार्मिक क्षेत्रों से जुड़े लोग व इतिहासकार इसे नहीं मानते हैं।

जलते टोपले फेकेंगे एक दूसरे पर

जिला मुख्यालय से लगभग 30 किमी दूर ग्राम धमनार में रावण वध की अनूठी परंपरा 65 सालों से जारी है। यहां रावण की 25 फीट ऊंची प्रतिमा पर चढ़ाई कर नाक पर मुक्का मारने के लिए राम-रावण की सेना में बंटे युवाओं में वाक युद्ध होता है। दोनों ही सेनाओं में शामिल युवा शब्द बाणों के साथ एक-दूसरे पर जलते हुए टोपले भी फेंकते हैं। राम की सेना में शामिल कोई भी युवक रावण प्रतिमा की नाक पर मुक्का मारकर प्रतीकात्मक वध करता है और युद्ध का अंत हो जाता है। इसके बाद शाम को कार्यक्रम में इन्हें पुरस्कृत करते हैं।