
नईदुनिया प्रतिनिधि, मंदसौर। मंदसौर जिले में दशहरे पर अति प्राचीन परंपरा चली आ रही है। मंदसौर में घनी बस्ती वाले क्षेत्र खानपुरा में लगभग 450 साल पुरानी रावण की प्रतिमा को नामदेव छीपा समाज पूजा-अर्चना करेगा। 20 अक्टूबर को सुबह खानपुरा स्थित बड़े मंदिर से जुलूस के साथ रावण प्रतिमा के यहां पहुंचकर पूजा करेंगे। शाम को पटाखे की लड़ चलाकर प्रतीकात्मक वध करेंगे।
जिला मुख्यालय से 30 किमी दूर धमनार में रावण प्रतिमा के सामने राम-रावण की सेना में वाक युद्ध होगा। वहीं एक दूसरे पर जलते हुए टोपले भी फेकेंगे। राम सेना में शामिल कोई एक युवक रावण की नाक पर मुक्का मारने के बाद युद्ध का अंत हो जाएगा।
ऐसी प्रचलित मान्यता है कि रावण की पत्नी मंदोदरी का पीहर मंदसौर में नामदेव समाज में ही था। इसके चलते खानपुरा क्षेत्र में रावण को जमाई राजा मानकर पूजते हैं।
दशहरे पर 20 अक्टूबर को सुबह 10 बजे नामदेव छीपा समाज के पुरुष व महिलाए खानपुरा स्थित बड़ा लक्ष्मीनारायण मंदिर से ढोल के साथ रावण प्रतिमा के यहां पहुंचकर पूजा-अर्चना करेंगे।
समाज के लोग रावण बाबा से पूरे क्षेत्र को बीमारी व महामारी से दूर रखने के लिए प्रार्थना करेंगे। रावण प्रतिमा के पैर में लच्छा भी बांधते हैं। शाम को गोधुलि वेला में रावण प्रतिमा की पूजा-अर्चना कर माफी मांगेंगे, प्रतीकात्मक वध करेंगे।
जिला मुख्यालय से लगभग 30 किमी दूर ग्राम धमनार में रावण वध की अनूठी परंपरा 65 सालों से जारी है। यहां रावण की 25 फीट ऊंची प्रतिमा पर चढ़ाई कर नाक पर मुक्का मारने के लिए राम-रावण की सेना में बंटे युवाओं में वाक युद्ध होता है। दोनों ही सेनाओं में शामिल युवा शब्द बाणों के साथ एक-दूसरे पर जलते हुए टोपले भी फेंकते हैं। राम की सेना में शामिल कोई भी युवक रावण प्रतिमा की नाक पर मुक्का मारकर प्रतीकात्मक वध करता है और युद्ध का अंत हो जाता है। इसके बाद शाम को कार्यक्रम में इन्हें पुरस्कृत करते हैं।