प्रभु श्रीराम, विष्णु जी के 7वें मानव अवतार थे। और माता सीता उनकी धर्मपरायण पत्नी, जो माता लक्ष्मी का अवतार थीं। पद्म पुराण के अनुसार भगवान श्रीराम ने सरयु नदी में स्वयं की इच्छा से समाधि ली थी।

इस बारे में विभिन्न धर्मग्रंथों में विस्तार से वर्णन मिलता है। श्रीराम द्वारा सरयु में समाधि लेने से पहले माता सीता धरती माता में समां गईं थी और इसके बाद ही उन्होंने पवित्र नदी सरयु में समाधि ली।

11 हजार साल तक किया था शासन!

- त्रेतायुग में रामराज्य यानी प्रभु श्री राम ने ग्यारह हजार वर्षों तक शासन किया।

- इस बात का उल्लेख वाल्मीकि रामायण में मिलता है।

- महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित सभी अठारह पुराणों की गणना में 'पदम पुराण' को द्वितीय स्थान प्राप्त है। जिसमें श्लोक संख्या पचपन हजार हैं।

कुछ इस तरह ली थी जल समाधि

- श्रीराम ने सभी की उपस्थिति में ब्रह्म मुहूर्त में सरयू नदी की ओर प्रयाण किया उनके पीछे था उनका परिवार।

- परिवार के मुख्य सदस्यों में भरत, शत्रुघ्न, उर्मिला, मांडवी और श्रुतकीर्ति।

- ऊं का उच्चारण करते हुए वे सरयू के जल में एक-एक पग आगे बढ़ते गए और जल उनके हृदय और अधरों को छूता हुआ सिर के उपर चढ़ गया।

- दरअसल, यमराज को ये पता था क‌ि भगवान की इच्छा के ब‌िना भगवान न तो स्वयं शरीर का त्याग करेंगे और न शेषनाग के अंशावतार लक्ष्मण जी।

- ऐसे में यमराज ने विधि के विधान को जारी रखने के लिए एक युक्ति खोजी। एक द‌िन यमराज क‌िसी व‌िषय पर बात करने भगवान राम के पास आ पहुंचे।

- भगवान राम ने जब यमराज से आने का कारण पूछा तो यमराज ने कहा क‌ि आपसे कुछ जरूरी बातें करनी है।

Posted By: Arvind Dubey

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