
दुनिया का हर धर्म आस्था पर टिका है। यह आस्था ही है, जिसके सहारे हम जिंदा हैं। केरल का श्री पद्मनाभं मंदिर इसी आस्था का जीता जागता उदाहरण है।
मंदिर से जुड़े इतिहास विशेषज्ञों का मत है, 'यह मंदिर त्रावणकोर के राज परिवार का है। मंदिर की खास बात और चर्चा का केंद्र है यहां की अकूत संपदा।'
लुटेरों से धन की सुरक्षा के लिए उस समय के राजाओं ने इसे कई तिलिस्मी तलघरों में सुरक्षित रखा है। जो आज भी मौजूद है। यहां धन कितना है किसी को नहीं मालूम। श्री पद्मनाभं मंदिर जिसें हम पद्मनाभस्वामी मंदिर भी कहते हैं भारत के केरल राज्य के तिरुअनंतपुरम में स्थित भगवान विष्णु का प्रसिद्ध हिन्दू मंदिर है।
भारत के प्रमुख वैष्णव मंदिरों में शामिल यह ऐतिहासिक मंदिर तिरुअनंतपुरम के अनेक पर्यटन स्थलों में से एक है। पद्मनाभं स्वामी मंदिर दक्षिण भारतीय वास्तुकला का एक अनुपम उदाहरण है।
मंदिर की एक ओर रोचक बात है और वो यह कि मंदिर में प्रवेश करने का पहनावा बिल्कुल अलग है। श्री पद्मनाभं मंदिर में कोई भी भगवान का भक्त कोट- पैंट पहनकर नहीं आ सकता है और महिलाएं सलवार, कुर्ता पहनकर नहीं जा सकती हैं। यहां महिलाओं को विशेष साड़ी और पुरुषों को धोती दी जाती है। जिसे पहन वह भगवान के दर पर नतमस्तक होते हैं।
मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु की विशाल मूर्ति विराजमान है जिसे देखने के लिए हजारों भक्त दूर दूर से यहां आते हैं। इस प्रतिमा में भगवान विष्णु शेषनाग पर शयन मुद्रा में विराजमान हैं। कहते हैं तिरुअनंतपुरम शहर का नाम नाम भगवान के 'अनंत' नामक नाग के नाम पर ही रखा गया है।
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यहां पर भगवान विष्णु की विश्राम अवस्था को 'पद्मनाभं' कहा जाता है और इस रूप में विराजित भगवान यहांपर पद्मनाभं स्वामी के नाम से विख्यात हैं।
इतिहास में उल्लेखित है सन् 1733 ई. में इस मंदिर का पुनर्निर्माण त्रावनकोर के राजा मार्तण्ड ने करवाया था। इसकी भव्यता को आधार बनाया गया मंदिर को विशाल रूप में निर्मित किया गया जिसमें उसका शिल्प सौंदर्य सभी को प्रभावित करता है।
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मंदिर के निर्माण में द्रविड़ एवं केरल शैली का मिला जुला प्रयोग देखा जा सकता है। मंदिर का गोपुरम द्रविड़ शैली में बना हुआ है।