
दुनिया को शून्य और वैदिक गणित भारत ने ही दिया है। वैदिक गणित के विषयों को लेकर 60 के दशक में अमेरिका के प्रसिद्ध समाचार पत्र न्यूयॉर्क टाईम्स के पत्रकार थॉमस फ्राईडमैन ने कहा था कि, 'यदि भारतीय बच्चे वैदिक गणित के महत्व और उपयोगिता को समझ लें तो भारत दुनिया में काफी कुछ बेहतर कर सकता है।'
वैदिक गणित के जरिए हम गणित को रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल कर सकते हैं। वर्तमान में जब हम टेक्नोलॉजी के आदी होते जा रहे हैं ऐसे में वैदिक गणित हमारे लिए काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
वैदिक गणित का कोई धर्म नहीं
वैदिक गणित भारत का सबसे प्राचीन गणित विज्ञान है, यह विज्ञान ऋषि-मुनियों ने हमें दिया था। वैदिक गणित आज भी बहुत कुछ सिखाता है यह गणित की गणनाओं को बहुत ही कम समय में हल कर देता है।
वैदिक गणित का किसी भी धर्म, संप्रदाय से कोई भी संबंध नहीं है। वैदिक गणित की विधि से गणित के हिसाब लगाने से आत्मविश्वास और स्मरणशक्ति दोनों बढ़ती है।
पढ़ें: क्रिकेट से सीखें ज़िंदगी का मैनेजमेंट
इतिहासविज्ञों का मानना है कि भारत का वैदिक गणित-ज्ञान यूनान और मिस्र की सभ्यता से भी पुराना बताया गया है।
कहते हैं कि यूनानी गणितज्ञ पाइथागोरस का प्रमेय से भी पहले भारत में लोगों को वैदिक गणित ज्ञात था! वैदिक विधि से बड़ी संख्याओं का जोड़ना-घटाना और गुणा-भाग ही नहीं, वर्ग और वर्गमूल, घन और घनमूल निकालना भी संभव है।
दुनिया के देशों ने अपनाया
जगद्गुरू स्वामी भारती कृष्ण तीर्थ द्वारा प्रचीन रचित वैदिक गणित अंकगणितीय गणना की वैकल्पिक एवं संक्षिप्त विधियों का समूह है। इसमें 16 मूल सूत्र दिये गये हैं। वैदिक गणित गणना की ऐसी पद्धति है, जिससे जटिल अंकगणितीय गणनाएं अत्यंत ही सरल, सहज व त्वरित संभव हैं।
पढ़ें:बाइबिल और हिंदू पौराणिक ग्रंथों में मौजूद है 'एलियन' का जिक्र
वर्तमान में वैदिक गणित इंग्लैंड, आयरलैंड, हॉलैंड, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और अमरीका सहित कई देशों में पढ़ाया जा रहा है साथ ही स्वीडन, जर्मनी, इटली पोलैंड और सिंगापुर ने तो इसे स्वीकार किया गया है।