• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • धर्म
  • कहते हैं

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 10, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

जानिए, अर्जुन ने बृहन्नला नाम रख इसलिए किया था ये काम

जब पांडव राजा विराट के यहां अज्ञातवास में रहे तो उन्होंने बहुत कुछ ऐसा किया जो उनके व्यवहार से बिल्कुल अलग था।

By Edited By:
Publish Date: Wed, 10 Jun 2015 01:05:58 PM (IST)Updated Date: Fri, 12 Jun 2015 02:25:13 PM (IST)
जानिए, अर्जुन ने बृहन्नला नाम रख इसलिए किया था ये काम

जब पांडव राजा विराट के यहां अज्ञातवास में रहे, तो उन्होंने बहुत कुछ ऐसा किया जो उनके व्यवहार से बिल्कुल अलग था। इस बात का विस्तार से वर्णन महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित और भगवान श्री गणेश जी द्वारा लिखित महान ग्रंथ महाभारत में मिलता है।

उस समय धर्मराज युधिष्ठर ने गेरुए वस्त्र पहन सन्यासी का वेश धारण किया। अर्जुन ने स्त्री रूप धारण किया ताकि कोई भी व्यक्ति उन्हें पहचान न सके।

युधिष्ठिर कंक के नाम से विराट के दरबारी बन गए और राजा विराट के साथ चौपड़ खेलकर दिन बिताने लगे। भीमसेन ने रसोईयों के मुखिया का दायित्व संभाला। भीमसेन कभी-कभी पहलवानों से कुश्ती लड़कर और हिंसक पशुओं को वश में कर, राजा का दिल बहलाया करता था।


पढ़ें: पापों से चाहिए मुक्ति तो कीजिए योगिनी एकादशी व्रत

अर्जुन बृहन्नला के नाम से रनिवास में स्त्रियों को खासतौर पर राजा विराट की कन्या उत्तरा और उसकी सहेलियों एवं दास-दासियों को नाच और गाना-बजाना सिखाते थे।

पढ़ें: यहां है देवी सती का बेहद दुर्लभ मंदिर जहां होती है तंत्र साधना

नकुल, घोड़ों को चारा खिलाना उन्हें नहलाना और उनकी बीमारियों से इलाज के लिए दवा देने का काम किया करते थे। सहदेव गाय बैलों की देखभाल करते थे।

पढ़ें: यह व्रत करके 88 हजार ब्राह्मण भोज का पुण्य लीजिए

वहीं, पांचाल नरेश द्रुपद की कन्या और पांडवों की पत्नी द्रौपदी, जिनकी सेवा में असंख्‍य दासियां रहती थीं राजा विराट की पत्नी सुदेष्णा की सेवा करती थीं।