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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 26, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

जब हनुमानजी ने ही दिया अपने मंदिर को सहारा

दिल्ली से महज 230 किमी एवं हरिद्वार से 60 किमी दूर है परमपावन धाम श्री सिद्धबली बाबा मंदिर।

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Publish Date: Mon, 26 Oct 2015 04:54:11 PM (IST)Updated Date: Tue, 27 Oct 2015 05:24:48 PM (IST)
जब हनुमानजी ने ही दिया अपने मंदिर को सहारा

दिल्ली से महज 230 किमी एवं हरिद्वार से 60 किमी दूर है परमपावन धाम श्री सिद्धबली बाबा मंदिर। यह मंदिर हनुमान जी का है। नजीबाबाद जंक्शन से यह मंदिर 30 किमी दूर, उत्तराखंड के कोटद्वार शहर में स्थित है।

मंदिर अपने तीनों तरफ से वनों से ढका है। इसके साथ ही यह स्थान श्री सिद्धबाबा (गुरु गोरखनाथ एवं उनके शिष्यों) का तपस्थान रहा है। यहां बाबा के अनुयायी आज भी धार्मिक अनुष्ठानों में व्यस्त रहते हैं।

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यह मंदिर कुछ वर्ष पहले, भूस्खलन के कारण ध्वस्त हो गया था, लेकिन आश्चर्य है यह अपने स्थान पर आज भी स्थिर है। मान्यता है कि उस समय स्वयं हनुमान जी ने मंदिर को अपने कन्धों पर सहारा दिया था।

यहां भक्त विश्वास लेकर आते हैं उनकी मनोकामना पूरी होगी और ऐसा ही होता है। श्री सिद्धबली बाबा को बरेली, बुलन्दशहर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, गाजियाबाद, बिजनौर, हरिद्वार आदि तक की भूमि का क्षेत्रपाल देवता के रूप में भी पूजा जाता है।


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सिद्धबली बाबा को आटा, गुड़, घी, भेली से बना रोट एवं नारियल का प्रसाद चढ़ता है। दिसम्बर माह में पौष संक्रान्ति के दिन सिद्धबाबा का तीन दिवसीय विशाल मेला लगता है, जिसमें लगातार तीन दिन तक बड़े भण्डारे आयोजित होते हैं। मंदिर एक खोह में बना हुआ है। यहां कई श्रद्धालुओं और पर्यटकों आते है।

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