
जातकों की राशि में वैसे तो सभी ग्रहों की महादशा होती है लेकिन कुछ महादशाओं के बारे में लोग अक्सर जानना चाहते हैं। शनि, राहु और केतु की महादशा इनमें ही एक है। हम आपको यहां बताने जा रहे हैं कि इनकी महादशा के समय जीवन किस तरह की घटनाएं होती हैं और बुरे प्रभाव से बचाव का क्या उपाय आजमाया जाना चाहिये।
1.शनि की महादशा
शनि को आयु, जीविका, नौकरी इत्यादि का कारण माना गया ह। यदि आपकी लग्न कुंडली में शनि तुला में होकर उच्च का है अथवा छठवें, आठवें, दसवें या बारहवें भाव में है तो आपको संपन्नता की राह दिखाता है। वृषभ और कन्या राशि के जातकों के लिए शनि की महादशा लाभदायक होती है। मेष, सिंह और धनु राशि के जातकों को न्याय संबंधी समस्याएं आ सकती हैं। वैसे तो शनि की महादशा में सभी को हर तरह की परिस्थियों से दो चार होना पड़ता है, क्योंकि शनि की महादशा 19 वर्ष की एक लंबी अवधि होती है।
उपाय -
अधिकतम लाभ के लिए पीपल के पेड़ की छांव में बैठ कर शनि मंत्रों का जाप करना या लोहे का एक छल्ला मध्यिका में पहनें।
राहु की महादशा
राहु एक छाया ग्रह है और दादा और पूर्वजों का कारक ग्रह है। मनुष्य के जीवन में जब भी कोई अवस्था ऐसी हो जब उसे कुछ सूझ न रहा हो तो समझना चाहिए कि राहु का प्रभाव है। राहु अस्थिरता का कारक ग्रह है। यदि आपकी कुंडली में मिथुन राशि में है तो अपनी महादशा में सकारात्मक प्रभाव देगा। आपकी कुंडली में राहु यदि दशम भावस्थ है तो अपनी महादशा में व्यवसायिक प्रगति दे सकता है।
उपाय-
राहु की महादशा में शिवजी की आराधना अवश्य करें। चंदन का एक टुकड़ा कंठ में धारण करें। लाभ के लिए अच्छे लोगों से मित्रता करें।
3.केतु की महादशा
राहु की तरह केतु भी एक छाया ग्रह है जो धनु राशि में उच्च का होता है। ये नाना और अन्य पितरों का कारक ग्रह है। केतु की महादशा में अनचाहे कार्यों को करने की स्थिति आ सकती है। मनुष्य विपरीत परिस्थितियों में फंस सकता है। यदि आपकी कुंडली में लग्नस्थ केतु सूर्य की युति में है तो अपनी दशा में आपको आर्थिक लाभ दे सकता है।
उपाय -
लाभ के लिए मत्स्यावतार का पूजन करें। पानी से भरा एक बर्तन सदैव अपने आसपास रखें।
(यह आलेख हस्तरेखातज्ञ पंडित विनोद जी द्वारा लिखा गया है)