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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 21, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

जब गजानन पीने लगे थे दूध, लेकिन यहां आज भी पीते हैं कालभैरव मदिरा

सचमुच! कभी-कभी ऐसी घटनाएं हम अपनी आंखों से देखते हैं, जिन पर यकीन करना थोड़ा मुश्किल होता है।

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Publish Date: Mon, 21 Sep 2015 05:22:59 PM (IST)Updated Date: Wed, 02 Dec 2015 01:34:46 PM (IST)
जब गजानन पीने लगे थे दूध, लेकिन यहां आज भी पीते हैं कालभैरव मदिरा

सचमुच! कभी-कभी ऐसी घटनाएं हम अपनी आंखों से देखते हैं, जिन पर यकीन करना थोड़ा मुश्किल होता है। लेकिन धार्मिक आस्था से जुड़ीं यह धार्मिक घटनाएं सत्य होती हैं। ऐसी ही एक दिव्य चमत्कारिक धार्मिक घटना आज से करीब 20 वर्ष पहले यानी 21 सितंबर 1995 को हुई थी। जिसके आगे आज विज्ञान भी निरुत्तर है।

आखिर क्या हुआ था 20 वर्ष पहले

दरअसल इस दिन भगवान श्री गणेश दूध पी रहे थे। भक्त उन्हें चम्मच से दूध पिला रहे थे। हो सकता है यह दृश्य हममे से कई लोगों ने देखा भी हो! लेकिन जो भी हो यह सच था। आस्था से जुडे़ इस पूरे घटनाक्रम को अगले दिन यानी 22 सितंबर 1995 को दुनियाभर के हर दैनिक अखबार ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था।


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इस बारे में अमेरिका की 'हिन्दूइज्म टूडे' मैगजीन में छपी खबर के मुताबिक 'एक व्यक्ति को सपने में भगवान गणेश दिखाई दिए। गणेश जी ने दूध पीने की इच्छा प्रकट की। वह व्यक्ति जागा और उसने नजदीक के मंदिर के पुजारी से यह बात कही। पुजारी ने जब उसे गणेशजी को दूध पिलाने की अनुमति दी तो मूर्ति चमत्कारिक रूप से दूध पी गई।'

यह है मास हाइपनोसिस थ्योरी

यह आस्था का चमत्कार था। जिससे वैज्ञानिक भी हैरान थे। धीरे-धीरे यह अफवाह समूचे उत्तर भारत में फैल गई। वैज्ञानिकों ने निष्कर्ष के रूप में जिस थ्योरी को जन्म दिया वह 'मास हाइपनोसिस' यानी 'साइको-मैकेनिक रिएक्शन' नाम दिया गया। हालांकि यह बात वैज्ञानिकों ने भी यह बात मान ली थी कि यह कोई दैवीय चमत्कार था जिसके बारे में जानकारी जुटाना विज्ञान के दायरे से बाहर है।

यहां आज भी पीते हैं कालभैरव मदिरा

गणेशजी के दूध पीने वाली घटना तो एक दिन ही हुई थी। लेकिन उज्जैन (मप्र) स्थित भगवान काल भैरव मंदिर में भगवान कालभैरव का रोज मदिरापान करते हैं। भक्त एकटक उन्हें देखते हैं। मदिरा का प्याला खाली हो जाता है।

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यह मंदिर सदियों पुराना है लेकिन इसका जीर्णोद्धार करीब 1000 वर्ष पहले परमार कालीन राजाओं ने करवाया था। यहां होने वाली इस चमत्कारिक घटना को देखने देश-विदेश से भक्त आते हैं।

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