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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 23, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

जब शिवजी ने की थी ब्रह्महत्या और नंदी को मान लिया गुरु

यह शहर कुंभ मेले के कारण भी दुनियाभर में पहचाना जाता है।

By AmitEdited By: Amit
Publish Date: Sat, 23 May 2015 01:14:17 PM (IST)Updated Date: Mon, 24 Apr 2017 09:47:46 AM (IST)
जब शिवजी ने की थी ब्रह्महत्या और नंदी को मान लिया गुरु

नासिक भारत के महाराष्ट्र राज्य का एक शहर है। यह शहर कुंभ मेले के कारण भी दुनियाभर में पहचाना जाता है। लेकिन इस शहर की एक और भी पहचान है और वो है यहां का प्रसिद्ध 'कपालेश्वर महादेव मंदिर' जोकि गोदावरी तट पर बना है।

ऐसा माना जाता है कि संसार का यह एक मात्र शिवमंदिर है जहां उनके वाहन नंदी मंदिर में नहीं है। हिंदू पौराणिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है, 'कपालेश्वर महादेव मंदिर में एक समय भगवान शिवजी ने निवास किया था। यह उस समय की बात है जब ब्रह्मदेव के पांच मुख थे।


चार मुख वेदोच्चारण करते थे, और पांचवां निंदा करता था। निंदा वाले मुख से शिव नाराज हो गए और उन्होंने उस मुख को ब्रह्माजी के शरीर से अलग कर दिया। इस घटना के कारण शिव जी को ब्रह्महत्या का पाप लगा।

उस पाप से मुक्ति पाने के लिए शिवजी ब्रह्मांड में हर जगह घूमे लेकिन उन्हें मुक्ति का उपाय नहीं मिला। एक समय जब वे सोमेश्वर में बैठे थे, तब एक बछड़े द्वारा उन्हें इस पाप से मुक्ति का उपाय बताया गया। बछड़े के रूप में नंदी थे।

वह शिव जी के साथ गोदावरी के रामकुंड तक गए और कुंड में स्नान करने को कहा। स्नान के बाद शिव जी ब्रह्महत्या के पाप से मुक्त हो सके। नंदी के कारण ही शिवजी की ब्रह्म हत्या से मुक्ति हुई थी।

इसलिए उन्होंने नंदी को गुरु माना और यहां यहीं शिवलिंग के रूप में स्थापित हो गए। चूंकि अब नंदी महादेव के गुरू बन गए इसीलिए उन्होंने इस मंदिर में उन्हें स्वयं के सामने बैठने से मना किया।