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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 05, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

कठिन तप से भगवान बाहुबली ने प्राप्त किया आत्मतत्व

वैदिक परम्परा में इन्हें आठवां अवतार माना गया है। ऋषभदेव के दो रानियां थीं।

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Publish Date: Fri, 05 Jun 2015 02:25:34 PM (IST)Updated Date: Wed, 10 Jun 2015 02:35:34 PM (IST)
कठिन तप से भगवान बाहुबली ने प्राप्त किया आत्मतत्व

जैन धर्म में अहिंसा को परम धर्म माना गया है। इस धर्म को मानने वाले अनुयायी ईश्वर या सृष्टिकर्ता को नहीं मानते वो तीर्थंकर को मानते हैं।

जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव जी हैं। वैदिक परम्परा में इन्हें आठवां अवतार माना गया है। ऋषभदेव के दो रानियां थीं। यशस्वती और सुनंदा। भगवान ऋषभदेव की दूसरी रानी यानी सुनन्दा ने 'बाहुबली' नाम के एक पुत्र और 'सुंदरी' नाम की कन्या का जन्म दिया।

ऋषभदेव ने प्रजा को असि, मसि आदि षट् क्रियाओं का उपदेश दिया। इस तरह प्रजा उन्हें युगादि पुरुष, विधाता, प्रजापति आदि नामों से पुकारने लगी।

किसी समय ऋषभदेव राजपाट से विरक्त हो वन को जाने लगे तब उन्होंने पहली रानी से उत्पन्न पुत्र भरत को अयोध्या का राज्य सौंपा और अपने दूसरी रानी से उत्पन्न पुत्र बाहुबली को पोदनपुर का अधिकारी बनाया।

इसी तरह उन्होंने यशस्वती द्वारा उत्पन्न 99 पुत्रों को भी अन्य देशों का राज्य देकर आप मुनि मार्ग अपनाकर दिगम्बर मुनि हो गए।

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इसी बीच ऋषभदेव के पुत्र बाहुबली ने एक वर्ष तक योग साधना के द्वारा अनेक ऋद्धि-सिद्धियां प्राप्त कर परम ज्योति स्वरूप केवल ज्ञान को प्रगट किया था।

कहते हैं महामुनि बाहुबली तपस्या में इतने मग्न थे कि वो वर्ष भर निश्चल खड़े रहे। सर्पों ने वामियां बना लीं, लताएं उनके शरीर से लिपट गईं और चिड़ियों ने घोंसले बना लिए फिर भी वे आत्मतत्त्व के चिंतन में और परमात्म तत्त्व के ध्यान में स्थिर थे।


भगवान बाहुबलि की दिव्य प्रतिमाएं

  • दक्षिण कर्नाटक में मूडबिद्री में बाहुबली की प्रतिमा हैं जो कि 41 फुट ऊंची है। इसका निर्माण लगभग सन् 1432 में हुआ है।
  • मूडबिद्री से कुछ दूर वेणूर में 35 फुट ऊंची बाहुबली की प्रतिमा है। इसका निर्माण सन् 1604 में हुआ है।
  • मैसूर के पास 'गोम्मटगिरि' नामक एक टीले पर 18 पुट ऊंची बाहूबली प्रतिमा है।
  • कर्नाटक के बीजापुर जिले के 'बादामिपर्वत' शिखर के उत्तरी ढाल पर चार शैल में उत्कीर्ण गुहा-मंदिर हैं। उनमें से चौथे गुहा मंदिर के मण्डप में तीर्थंकर मूर्तियों के मध्य एक भगवान बाहुबली की मूर्ति है। यह 7फुट 6 इंच है। यह मूर्ति 'प्रिंस ऑफ वेल्स संग्रहालय, मुम्बई' में (क्र.105) रखी हुई है।

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  • देवगढ़ से प्राप्त 10वीं शताब्दी की मूर्ति है जो वहीं के 'साहू जैन संग्रहालय' में रखी है। देवगढ़ में बाहुबली की 6 मूर्तियां प्राप्त हैं। बिलहरी (जिला-जबलपुर) म.प्र. से एक शिलापट्ट प्राप्त हुआ है जिस पर बाहुबली का प्रतिबिम्ब उत्कीर्ण है।