'सूर्य देव को रथ में घोड़ों की जगह लगाने पड़े थे गधे, कम हो गया था तेज', पढ़ें खरमास को अशुभ मानने का कारण
16 दिसंबर 2025 से 14 जनवरी 2026 तक खरमास रहेगा। इस दौरान सूर्य धनु राशि में होने के कारण शुभ कार्यों पर रोक रहेगी। धार्मिक मान्यता है कि इस समय सूर्य का तेज कम हो जाता है, जबकि ज्योतिषीय दृष्टि से गुरु का प्रभाव घटता है। इसलिए मांगलिक कार्यों को अशुभ माना जाता है।
Publish Date: Tue, 02 Dec 2025 08:21:11 AM (IST)
Updated Date: Tue, 02 Dec 2025 08:24:45 AM (IST)
खरमास को हिंदू धर्म में अशुभ माना जाता है। (फाइल फोटो)HighLights
- सूर्य धनु राशि प्रवेश, शुभ कार्यों पर रोक प्रभावी।
- धार्मिक कथा अनुसार सूर्यदेव रथ गति धीमी होती है।
- सूर्य का तेज कम, शुभ फल अधूरे मिलते हैं।
धर्म डेस्क। उत्तर भारत सहित पूरे देश में 16 दिसंबर 2025 से एक बार फिर खरमास की शुरुआत होने जा रही है, जो 14 जनवरी 2026 तक चलेगा। हर वर्ष की तरह इस बार भी मकर संक्रांति तक शुभ-मांगलिक कार्यों, विवाह, गृहप्रवेश, भूमि-पूजन आदि पर रोक रहेगी।
हिंदू पंचांग के अनुसार, खरमास वह समय है जब सूर्यदेव धनु राशि में प्रवेश करते हैं और यह अवधि लगभग एक माह तक रहती है। इसे धर्म और ज्योतिष दोनों दृष्टियों से अशुभ माना गया है। आइए समझते हैं कि खरमास को अशुभ क्यों कहा जाता है।
खरमास के अशुभ माने जाने के धार्मिक कारण
- पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सूर्यदेव सात घोड़ों के रथ पर निरंतर यात्रा करते हैं। उन्हें कहीं भी रुकने की अनुमति नहीं, क्योंकि उनके ठहरते ही पृथ्वी पर जीवन बाधित हो जाएगा। निरंतर यात्रा से थक चुके घोड़ों पर दया करते हुए सूर्यदेव कभी-कभी उन्हें पानी और विश्राम देने की सोचते हैं।
- किंवदंती है कि एक बार घोड़ों को विश्राम देने के लिए सूर्यदेव एक सरोवर तट पर पहुंचे। परंतु उन्हें डर था कि यदि रथ रुक गया तो अनर्थ होगा। तभी उन्हें वहां दो खर (गधे) दिखाई दिए। सूर्यदेव ने घोड़ों को आराम देने के लिए उन गधों को रथ में जोड़ लिया।
लेकिन गधे घोड़ों जितने तेज नहीं होते, जिसके कारण सूर्यदेव के रथ की गति कम हो गई और उनके तेज में भी कमी आई। यह स्थिति लगभग एक मास तक बनी रहती है, जिसे खरमास कहा गया। इस अवधि में सूर्य का प्रभाव कमजोर रहने के कारण शुभ कार्य करने पर पूर्ण फल नहीं मिलता, इसलिए इस समय को शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना गया। खरमास के अशुभ होने के ज्योतिषीय कारण
- सूर्यदेव गुरु की राशियों धनु या मीन में प्रवेश करते हैं, तो गुरु ग्रह का प्रभाव कम हो जाता है। मंगल कार्यों में गुरु की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- सूर्य और गुरु के बीच ज्योतिष में वैमनस्य माना गया है। ऐसे में सूर्य गुरु की राशि में रहते हुए अपने तेज को कम कर देते हैं।
- शुभ कार्यों के लिए सूर्य और गुरु दोनों का मजबूत होना आवश्यक है, जबकि इस अवधि में दोनों ग्रहों की शुभता कमजोर पड़ जाती है।