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अंतिम संस्कार के बाद पीछे मुड़कर क्यों नहीं देखना चाहिए? जानिए गरुड़ पुराण का रहस्य

Garuda Purana: हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद किए जाने वाले सोलह संस्कारों में अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण संस्कार अंत्येष्टि माना जाता है। इस संस्कार से ज...और पढ़ें

By Himadri Singh HadaEdited By: Himadri Singh Hada
Publish Date: Sat, 03 Jan 2026 03:16:43 PM (IST)Updated Date: Sat, 03 Jan 2026 03:16:43 PM (IST)
अंतिम संस्कार के बाद पीछे मुड़कर क्यों नहीं देखना चाहिए? जानिए गरुड़ पुराण का रहस्य
दाह संस्कार के बाद पीछे मुड़कर न देखना।

HighLights

  1. दाह संस्कार के बाद पीछे मुड़कर न देखना।
  2. गरुड़ पुराण के अनुसार धार्मिक कारण।
  3. ये हैं मोह का बंधन टूटने का संकेत।

धर्म डेस्क। हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद किए जाने वाले सोलह संस्कारों में अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण संस्कार अंत्येष्टि माना जाता है। इस संस्कार से जुड़ी कई परंपराएं और नियम हैं, जिनका पालन सदियों से किया जाता आ रहा है। इन्हीं में से एक प्रमुख परंपरा है दाह संस्कार के बाद पीछे मुड़कर न देखना।

श्मशान से लौटते समय बड़े-बुजुर्ग अक्सर इस बात पर विशेष जोर देते हैं। आखिर इसके पीछे क्या वजह है? आइए जानते हैं गरुड़ पुराण, धार्मिक मान्यताओं और मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से इसके कारण।

गरुड़ पुराण के अनुसार धार्मिक कारण

गरुड़ पुराण के प्रेत कल्प में मृत्यु के बाद आत्मा की स्थिति का विस्तार से वर्णन मिलता है। शास्त्रों के अनुसार, शरीर का दाह संस्कार हो जाने के बाद भी आत्मा को अपने सांसारिक मोह से पूरी तरह मुक्त होने में समय लगता है।


मोह का बंधन टूटने का संकेत

मान्यता है कि यदि परिजन श्मशान से लौटते समय पीछे मुड़कर देखते हैं, तो आत्मा को यह संकेत मिल सकता है कि परिवार का मोह अभी भी बना हुआ है। इससे आत्मा की परलोक यात्रा में बाधा आ सकती है।

पीछे न देखना इस बात का प्रतीक माना जाता है कि मृतक का इस संसार से संबंध समाप्त हो चुका है और आत्मा को आगे बढ़ने की अनुमति दी जा रही है।

मनोवैज्ञानिक कारण

मृत्यु किसी भी व्यक्ति के लिए गहरा मानसिक आघात होती है। दाह संस्कार के दौरान और उसके बाद की तस्वीरें मन पर लंबे समय तक असर छोड़ सकती हैं।

आगे बढ़ने का संदेश

पीछे मुड़कर देखने से चिता, आग और अंतिम विदाई के दृश्य फिर से मन में उभर आते हैं, जिससे दुख और गहरा हो सकता है। यह परंपरा व्यक्ति को मानसिक रूप से मजबूत रहने और जीवन में आगे बढ़ने का संदेश देती है।

नकारात्मक ऊर्जा से जुड़ी मान्यताएं

शास्त्रों और लोक मान्यताओं के अनुसार, श्मशान घाट को नकारात्मक ऊर्जा और अतृप्त आत्माओं का स्थान माना गया है।

आत्मिक सुरक्षा की भावना

ऐसी मान्यता है कि पीछे मुड़कर देखने से व्यक्ति नकारात्मक शक्तियों की ओर ध्यान आकर्षित कर सकता है। सीधा आगे बढ़ते रहना आत्मिक सुरक्षा और सकारात्मक ऊर्जा को बनाए रखने का प्रतीक माना जाता है।

दाह संस्कार के बाद पीछे न देखना सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि इसके पीछे धार्मिक आस्था, मनोवैज्ञानिक संतुलन और आत्मिक सुरक्षा से जुड़े गहरे अर्थ छिपे हैं। यह परंपरा मृत आत्मा को शांति देने और जीवित लोगों को जीवन में आगे बढ़ने का संदेश देती है।