Badrinath Dham: इन तीन चाबियों से खुलते हैं बद्रीनाथ धाम के कपाट, जानिए मंदिर से जुड़ी रहस्यमयी बातें
बद्रीनाथ मंदिर दो पहाड़ों के बीच स्थित है। इन पर्वतों को नारायण पर्वत के नाम से जाना जाता है। ...और पढ़ें
By Ekta SharmaEdited By: Ekta Sharma
Publish Date: Sun, 12 May 2024 01:51:05 PM (IST)Updated Date: Sun, 12 May 2024 01:51:05 PM (IST)
बद्रीनाथ धाम से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें।HighLights
- 10 मई को गंगोत्री, यमुनोत्री और केदारनाथ धाम के कपाट खुल गए हैं।
- बद्रीनाथ जी की स्वनिर्मित पाषाण शालिग्राम मूर्ति की विशेष पूजा की जाती है।
- बद्रीनाथ मंदिर के कपाट 3 चाबियों से खुलते हैं।
धर्म डेस्क, इंदौर। Badrinath Dham: बद्रीनाथ धाम के कपाट आज यानी 12 मई को खुल चुके हैं। मंदिर को फूलों से शानदार अंदाज में सजाया गया है। यह मंदिर उत्तराखंड के चमोली जिले में अलकनंदा नदी के तट पर स्थित है। इससे पहले 10 मई को गंगोत्री, यमुनोत्री और केदारनाथ धाम के कपाट खुल गए हैं। बद्रीनाथ मंदिर में भगवान बद्रीनाथ जी की स्वनिर्मित पाषाण शालिग्राम मूर्ति की विशेष पूजा की जाती है। आइए, जानते हैं बद्रीनाथ मंदिर से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें।
बद्रीनाथ धाम से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
- बद्रीनाथ मंदिर के कपाट 3 चाबियों से खुलते हैं। एक चाबी उत्तराखंड के टिहरी राजपरिवार के शाही पुजारी के पास है, दूसरी चाबी मेहता लोगों के पास है, जो बद्रीनाथ मंदिर के अधिकार धारक हैं और तीसरी चाबी भंडारी लोगों के पास है, जो भी मंदिर के अधिकार धारक हैं।
बद्रीनाथ मंदिर दो पहाड़ों के बीच स्थित है। इन पर्वतों को नारायण पर्वत के नाम से जाना जाता है। मान्यता के अनुसार, जगत के रचयिता भगवान विष्णु के अंश नर और नारायण ने इन्हीं पर्वत पर तपस्या की थी। अगले जन्म में नर का जन्म अर्जुन के रूप में हुआ और नारायण का जन्म भगवान श्री कृष्ण के रूप में हुआ।
शास्त्रों के अनुसार, बद्रीनाथ की मूर्ति शालग्रामशिला से निर्मित है। बौद्धों के शासन काल में बुद्ध की मूर्ति मानकर पूजा प्रारम्भ हुई। शंकराचार्य जी छह माह तक बद्रीनाथ धाम में रहे। बाद में वे केदारनाथ धाम गए।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलते हैं, तो मंदिर में जलते दीपक के दर्शन करने का विशेष महत्व होता है। जब मंदिर 6 महीने तक बंद रहता है, तो भगवान इस दीपक को जलाए रखते हैं। डिसक्लेमर
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