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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 18, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

नज़र के नज़रिए ने बनाया स्मरणीय पल

हमेशा अपना नजरिया ठीक रखना चाहिए हो सकता है आपके विरोधी भी आपकी प्रसन्नता करने लगें।

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Publish Date: Thu, 18 Jun 2015 03:17:01 PM (IST)Updated Date: Thu, 25 Jun 2015 12:53:15 PM (IST)
नज़र के नज़रिए ने बनाया स्मरणीय पल

एक दिन छत्रपति शिवाजी अपने शिविर में बैठे सेनापति माधव का इंतजार कर रहे थे। तभी सेनापति एक ग्रंथ लेकर उनके पास पहुंचा। माधव के पीछे एक डोला भी था। उसने प्रसन्नतापूर्वक कहा, 'मुगल सेना को खदेड़ कर भगा दिया गया है और राजा बहलोल खां जान बचाकर भाग गया है।'

शिवाजी ने पूछा, 'लेकिन सेनापति ये डोले में क्या है ?' माधव ने कहा, 'इसमें स्वर्ग की परी कही जाने वाली बहलोल खां की बेगम गौहर बानू हैं। जो आपकी जीत होने की खुशी में यहां लाई गई हैं। इस तरह हम उन्हें अपमानित कर मुगल शासक से प्रतिशोध ले सकेंगे।'


शिवाजी के सामने गौहर बानू को पेश किया गया। शिवाजी ने कहा, 'आप अत्यंत सुंदर हैं। काश ! मेरा जन्म आपके पुत्र के रूप में होता तो मैं भी इतना ही सुंदर होता।' इसके बाद शिवाजी ने अपने सेनापति पर काफी नाराज हुए और उन्होंने कहा कि बेगम गौहर खां को पूरे राजकीय सम्मान से राजा बहलोल खां के हवाले कर दिया जाए।

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अपनी बेगम गौहर बानू को सही हालात में देखकर बहलोल खां शिवाजी की उदारता का कायल हो गया। और इस तरह वह उनकी सच्ची वीरता के आगे नतमस्तक हो गया।

संक्षेप में

हमेशा अपना नजरिया ठीक रखना चाहिए हो सकता है आपके विरोधी भी आपकी प्रसन्नता करने लगें।