• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • AI बूटकैंप
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • गणेशोत्‍सव 2026
  • हनुमान अंश
  • Mutual Funds मास्टरी
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • मानसून
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • धर्म
  • प्रेरक प्रसंग

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 13, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

भगवान शिव ने देवी सती को दिया था विधवा होने का श्राप, पढ़ें पौराणिक कथा

देवी धूमावती भयानक और वृद्ध स्वरूप में दिखाई देती हैं। देवी मां एक रथ पर सवार रहती हैं। इस रथ में किसी प्रकार का ध्वज नहीं होता है। उनका वाहन कौवा है।...और पढ़ें

By Ekta SharmaEdited By: Ekta Sharma
Publish Date: Thu, 13 Jun 2024 01:55:27 PM (IST)Updated Date: Thu, 13 Jun 2024 01:55:27 PM (IST)
भगवान शिव ने देवी सती को दिया था विधवा होने का श्राप, पढ़ें पौराणिक कथा
देवी सती से जुड़ी पौराणिक कथाएं।

HighLights

  1. रोग, पीड़ा और शोक की देवी हैं मां धूमावती।
  2. विधवा देवी के रूप में होती है माता की पूजा।
  3. रोगों से पीड़ित लोगों को करनी चाहिए देवी धूमावती की पूजा।

धर्म डेस्क, इंदौर। Dhumavati Jayanti 2024: धार्मिक ग्रंथों में सती-स्वरूपा देवी धूमावती का उल्लेख मिलता है। देवी धूमावती दस महाविद्याओं में सातवीं देवी मानी जाती हैं। इन्हें विधवा देवी के नाम से जाना जाता है। हर साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को धूमावती जयंती मनाई जाती है। इस साल यह 14 जून, 2024 को मनाई जाएगी। यह दिन देवी धूमावती को समर्पित माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब माता सती ने अपने पिता के घर में हवन कुंड में खुद को भस्म कर लिया था, तब उनके शरीर से निकले धुएं से माता धूमावती प्रकट हुईं। मां धूमावती को रोग, पीड़ा और शोक को नियंत्रित करने वाली महाविद्या कहा गया है।

विवाहित महिलाएं देवी धूमावती की पूजा नहीं करती हैं, क्योंकि यह देवी विधवा स्वरूप में हैं। किसी भयानक रोग से पीड़ित लोगों को इनकी पूजा करनी चाहिए। देवी धूमावती से जुड़ी एक और पौराणिक कथा प्रचलित है।

देवी धूमावती से जुड़ी पौराणिक कथा

एक बार देवी सती के साथ कुछ ऐसा हुआ कि उन्हें बहुत भूख लगने लगी। अत्यधिक भूख के कारण देवी सती ने देखते ही देखते सब कुछ निगल लिया, लेकिन फिर भी उनकी भूख शांत नहीं हुई। अत्यधिक भूख से पीड़ित होकर देवी इधर-उधर भटक रही थी, तभी भगवान शिव उनके सामने प्रकट हुए। तब देवी सती ने बिना कुछ देखे या समझे भगवान शिव को निगल लिया। इससे हर तरफ हड़कंप मच गया।


सभी देवता मिलकर माता सती के पास गए और देवी सती से भगवान शिव को मुक्त करने की प्रार्थना की। देवी सती को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने भगवान शिव को रिहा कर दिया। तब भगवान शिव क्रोधित हो गए और देवी सती को वृद्ध विधवा होने का श्राप दे दिया। श्राप के प्रभाव से देवी सती वृद्ध विधवा हो गईं। देवी सती के इस वृद्ध विधवा रूप को धूमावती कहा गया। देवी सती के धूमावती रूप को एक विधवा देवी के रूप में पूजा जाने लगा।

डिसक्लेमर

'इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।'