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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 01, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Mahakumbh 2025: हर 12 साल में लगता है महाकुंभ, समुद्र मंथन से जुड़ी है पौराणिक कथा

बृहस्पति की बारह वर्षों की पुनरावृत्ति भी कुंभ मेले का मुख्य आधार है। कहा जाता है कि देवताओं और असुरों के बीच हुए अमृत मंथन के कारण कुंभ मेले की शुरुआत हुई थी। यह मंथन देवताओं और असुरों के बीच 12 दिन तक हुआ था, जो कि मनुष्य के 12 सालों के बराबर माना जाता है।

By Ekta SharmaEdited By: Ekta Sharma
Publish Date: Thu, 01 Aug 2024 10:39:26 AM (IST)Updated Date: Fri, 02 Aug 2024 10:00:00 AM (IST)
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Mahakumbh 2025: हर 12 साल में लगता है महाकुंभ, समुद्र मंथन से जुड़ी है पौराणिक कथा
अब 2025 में महाकुंभ आयोजित किया जाने वाला है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

HighLights

  1. कुंभ मेले का इतिहास 850 साल पुराना बताया जाता है।
  2. कहा जाता है कुंभ मेले की शुरुआत शंकराचार्य ने की थी।
  3. जहां गिरी थी अमृत की बूंदें, वहां होता है महाकुंभ आयोजन।

धर्म डेस्क, इंदौर। Mahakumbh 2025: हम सभी जानते हैं कि हर 12 साल में महाकुंभ मेले का आयोजन होता है। कुंभ मेले का इतिहास बहुत ही रोचक है। हर 12 साल में कुंभ मेले का आयोजन देश में चार जगह पर किया जाता है, जिसमें हरिद्वार, प्रयागराज, नासिक और उज्जैन शामिल है।

नासिक और उज्जैन में हर साल कुंभ मेले का आयोजन किया जाता है। पिछली बार प्रयागराज में महाकुंभ साल 2013 में आयोजित किया गया था। इसके बाद अब 2025 में महाकुंभ आयोजित किया जाएगा।

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ग्रहों की स्थिति के आधार पर मेले का आयोजन

कुंभ मेले का इतिहास 850 साल पुराना है। इसकी शुरुआत शंकराचार्य ने की थी। 12 सालों में लगने वाले महाकुंभ में दुनिया भर से लोग शामिल होते हैं। ज्योतिष के अनुसार, कुंभ मेले का आयोजन ग्रहों की स्थिति यानी कि बृहस्पति के कुंभ राशि में प्रवेश और सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के आधार पर होता है।


पौराणिक कथाओं के अनुसार कहा जाता है कि कुंभ का आयोजन समुद्र मंथन के दौरान आदिकाल से ही हो गया था। जब देवताओं और राक्षसों ने मिलकर अमरता का अमृत उत्पन्न करने के लिए समुद्र मंथन किया था, उस समय सबसे पहले विष निकला था, जिसे भगवान शिव ने ग्रहण किया था। उसके बाद जब अमृत निकला, तो उसे देवताओं ने ग्रहण किया था।

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12 स्थानों पर गिरी थी अमृत की बूंदें

  • काल भेद के कारण देवताओं के 12 दिन मनुष्य के 12 वर्षों के समान हैं, इसलिए महापर्व कुंभ हर स्थल पर 12 साल बाद लगता है।
  • समुद्र मंथन के दौरान देवता और राक्षसों के बीच अमृत के घड़े के लिए लड़ाई 12 दिनों तक चली थी, जो मनुष्य के लिए 12 साल के बराबर माना जाता है।
  • यही कारण है कि हर 12 साल बाद महाकुंभ मेले का आयोजन किया जाता है। कहा जाता है कि इस अवधि के दौरान नदियां अमृत में बदल गई थीं, इसलिए दुनिया भर के कई तीर्थयात्री पवित्रता के सार में स्नान करने के लिए कुंभ मेले में आते हैं।

  • पौराणिक कथा के अनुसार देवताओं और असुरों के बीच 12 सालों तक संग्राम चला था। इस संग्राम में 12 स्थान पर अमृत की बूंदें गिरी थीं।
  • इसमें आठ जगह देवलोक और चार जगह पृथ्वी थी। जिन स्थानों पर यह अमृत गिरा था, वह प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक थे। जहां पर महाकुंभ मेले का आयोजन किया जाता है।
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    डिसक्लेमर

    'इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।'

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