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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 12, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

देखिए मेरा पेट है कब्रिस्तान नहीं

किसी अन्य व्यक्ति द्वारा इसका उपहास उड़ाए जाने पर आपको उसका उचित उत्तर देना चाहिए।

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Publish Date: Sun, 12 Apr 2015 03:31:29 PM (IST)Updated Date: Mon, 20 Apr 2015 10:58:44 AM (IST)
देखिए मेरा पेट है कब्रिस्तान नहीं

विश्व प्रसिद्ध साहित्यकार जार्ज बर्नाड शॉ शाकाहारी थे। एक दिन उन्हें अपने एक मांसाहारी मित्र के यहां भोज में जाना पड़ा। मित्र ने उनके लिए शाकाहार का विशेष प्रबंध किया।

वे आनंदपूर्वक भोजन कर ही रहे थे, तभी अचानक साथ में भोजन करने वाले लोगों ने उनसे मजाकिया अंदाज में कहा, मान्यवर, चिकिन पुलाव खाइए, क्या घांस और पत्तों से पेट भर रहे हैं। जार्ज साहब ने भी नहले पे दहला जमाते हुए कहा, भाई मेरा पेट है कब्रिस्तान नहीं।

संक्षेप में

आपके विचार, खान-पान आपका अपना है। किसी अन्य व्यक्ति द्वारा इसका उपहास उड़ाए जाने पर आपको उसका उचित उत्तर देना चाहिए।