
एक साहूकार को धन एकत्र का बड़ा शौक था। उसे अपनी योग्यता का बहुत घमंड था। जब कोई महात्मा उसके दर पर आते तो वो उनका सम्मान तो करता लेकिन मन ही मन उन्हें भला-बुरा कहता रहता।
एक दिन उस साहूकार ने एक महात्मा जी को भोजन कराया। फिर एक आईना देते हुए कहा, 'महाराज जहां भी आपको दुनिया का सबसे बड़ा मूर्ख दिखाई दे, उसे ये आईना दे दीजिएगा।'
महात्मा वह आईना लेकर चले गए। कई साल बीत जाने के बाद वह महात्मा पुनः उस शहर में आए। लेकिन वो साहूकार मृत्यु शय्या पर अपनी अंतिम सांसें गिन रहा था। वह साहूकार के घर पहुंचे।
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महात्मा जी ने साहूकार से पूछा, 'सेठजी क्या आप कोई ऐसी विद्या जानते हैं जिससे आपके प्राण बच सकें ?' साहूकर ने 'न' में उत्तर दिया। महात्माजी ने फिर पूछा, 'क्या तुम्हारा धन तुम्हें मृत्यु से बचा सकता है।'
साहूकार बोला, 'नहीं महात्माजी। तब महात्मा ने उसे आईना देते हुए कहा, 'सेठ जी ! मुझे अब तक सबसे बड़े मूर्ख तुम ही मिले हो जिसने धन के आगे अपनी जिंदगी व्यर्थ में गंवा दी।'
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संक्षेप में
ऐसे लोग दुनिया के सबसे बड़े मूर्ख होते हैं जो यह सोचते हैं कि उनके पास अगर धन है तो वो मृत्यु को भी खरीद सकते हैं।