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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 26, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

लंका मीनार जहां साथ नहीं जा सकते भाई-बहन, जानिए कारण

मंदोदरी की भूमिका घसीटीबाई नामक एक मुस्लिम महिला निभाती थी।

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Publish Date: Tue, 26 Jun 2018 01:16:36 PM (IST)Updated Date: Tue, 26 Jun 2018 01:59:45 PM (IST)
लंका मीनार जहां साथ नहीं जा सकते भाई-बहन, जानिए कारण

उत्तर प्रदेश में जालौन में 210 फीट ऊंची एक मीनार है जिसका नाम ‘लंका मीनार’ है। लंका मीनार नाम इसलिए पड़ा क्योंकि इसके अंदर रावण के पूरे परिवार का चित्रण है। इस मीनार से जुड़ी एक और मान्यता है कि यहां भाई-बहन के एक साथ आने की मनाही है। जानिए इसी बारे में -

लंका मीनार की नीचे से ऊपर तक की चढ़ाई में 7 परिक्रमाएं होती हैं। भाई-बहन ये परिक्रमा नहीं कर सकते है। यह परिक्रम एक तरह से सात फेरे मानी जाती है, जो केवल पति-पत्नी द्वारा लिए जाते हैं। इसीलिए भाई-बहन का एक साथ यहां जाना निषेध है।


खास बात यह है कि इस मीनार का निर्माण मथुरा प्रसाद ने कराया था जो रामलीला में रावण का किरदार निभाते थे। लोग बताते हैं कि रावण का किरदार उनके मन में इस कदर बस गया कि उन्होंने रावण की याद में लंका का निर्माण करवा दिया।

इस मीनार का निर्माणकार्य 1875 में शुरू हुआ था और बनने में 20 साल लग गए। तक निर्माण पर 1 लाख 75 हजार रुपए खर्च आया था।

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इसमें सौ फीट के कुम्भकर्ण और 65 फीट ऊंचे मेघनाथ की प्रतिमाएं लगी हैं। वहीं मीनार के सामने भगवान चित्रगुप्त और भगवान शंकर की मूर्ति है।

मुस्लिम महिला बनती थी रावण की पत्नी

मथुरा प्रसाद न केवल रामलीला का आयोजन कराते थे, बल्कि इसमें रावण का किरदार भी खुद निभाते थे। मंदोदरी की भूमिका घसीटीबाई नामक एक मुस्लिम महिला निभाती थी।

मंदिर का निर्माण इस तरह कराया गया है कि रावण अपनी लंका से भगवान शिव के 24 घंटे दर्शन कर सकता है। परिसर में 180 फीट लंबे नाग देवता और 95 फीट लंबी नागिन गेट पर बैठी है। जो कि मीनार की रखवाली करते हैं।

नाग पंचमी पर इस कंपाउंड में भव्य मेले का आयोजन किया जाता है और दंगल भी लगता है। कुतुबमीनार के बाद यही मीनार भारत की सबसे ऊंची मीनारों में शामिल है।