• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • दिवाली पूजन 2026
  • होम
  • धर्म
  • वास्तु

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 04, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

VIDEO: तंजौर का यह विश्व धरोहर मंदिर रहस्यों से है भरा

दोपहर को मंदिर के हर हिस्से की परछाई जमीन पर दिखती है, लेकिन इसके गुंबद की परछाई पृथ्वी पर नहीं पड़ती।

By Edited By:
Publish Date: Thu, 04 Jan 2018 08:31:52 AM (IST)Updated Date: Thu, 04 Jan 2018 10:08:45 AM (IST)
  • को पसंदीदा स्रोत बनाएं preferred source google
VIDEO: तंजौर का यह विश्व धरोहर मंदिर रहस्यों से है भरा

मल्टीमीडिया डेस्क। तमिलनाडु के तंजौर जिले में स्थित प्रसिद्ध शिव मंदिर बृहदेश्वर को ग्यारहवीं सदी के आरम्भ में बनाया गया था। यह मंदिर चोल शासकों की महान कला केंद्र रहा है। बृहदेश्वर मंदिर वास्तुकला, पाषाण व ताम्र में शिल्पांकन, चित्रांकन, नृत्य, संगीत, आभूषण एवं उत्कीर्णकला का बेजोड़ नमूना है।

इस भव्य मंदिर को सन1987 में यूनेस्को ने विश्व धरोहर घोषित किया। भगवान शिव को समर्पित बृहदेश्वर मंदिर शैव धर्म के अनुयायियों के लिए पवित्र स्थल रहा है।

राजाराज चोल प्रथम ने 1010 एडी में इस मंदिर का निर्माण कराया था। यह मंदिर उनके शासनकाल की गरिमा का श्रेष्‍ठ उदाहरण है। वर्ष 2010 में इसके निर्माण के एक हजार वर्ष पूरे हुए थे।

कहां से आया ग्रेनाइट

मंदिर के निर्माण में एक लाख 30 हजार टन ग्रेनाइट से इसका निर्माण किया गया। यह पत्थर आस-पास के इलाके में नहीं मिलता है। ऐसे में यह रहस्य है कि इतने विशाल पत्थरों को हजारों साल पहले यहां कैसे लाया गया था।


पिता ने पुत्र को ऐसे सिखाया कि दोस्ती का असली अर्थ क्या होता है

मंदिर में पत्थरों को जोड़ने के लिए सीमेंट या किसी किस्म के ग्लू का इस्तेमाल नहीं किया गया है। इसकी बजाए इसे पजल्स सिस्टम से जोड़ा गया है।

naidunia_image

हैरान करती है यह खासियत

दुनिया में पीसा की मीनार सहित कई ऊंची संरचनाएं टेढ़ी हो रही हैं, जबकि यह मंदिर आज भी पहले की तरह ही सीधा बना हुआ है। इस मंदिर के निर्माण कला की प्रमुख विशेषता यह है कि दोपहर को मंदिर के हर हिस्से की परछाई जमीन पर दिखती है।

मगर, इसके गुंबद की परछाई पृथ्वी पर नहीं पड़ती। लोगों की समझ से यह रहस्य आज भी परे है कि ऐसा क्यों होता है?

naidunia_image

80 टन का है कलश

इसके शिखर पर स्वर्णकलश स्थित है। मंदिर का कुंभम् (कलश) जो कि सबसे ऊपर स्थापित है, केवल एक पत्थर को तराश कर बनाया गया है और इसका वजन 80 टन का है। बताया जाता है कि इस कलश को वहां तक पहुंचाने के लिए छह किलोमीटर लंबा रैंप (ढलान) बनाया गया था। इस पर लुढ़काकर इस पत्थर को मंदिर के शिखर पर पहुंचाया गया था।

naidunia_image

तंजौर के हर कोने से दिखता है मंदिर

13 मंजिला इस मंदिर को तंजौर के किसी भी कोने से देखा जा सकता है। मंदिर की ऊंचाई 216 फुट (66 मीटर) है और संभवत: यह विश्व का सबसे ऊंचा मंदिर है। यहां स्थित नंदी की प्रतिमा भारतवर्ष में एक ही पत्थर को तराशकर बनाई गई नंदी की दूसरी सर्वाधिक विशाल प्रतिमा है। यह 16 फुट लंबी और 13 फुट ऊंची है।

घर बनाने के लिए तोड़ी दीवार, मिला प्राचीन रहस्यमयी शहर

naidunia_image

चोल शासकों ने इस मंदिर को राजराजेश्वर नाम दिया था परंतु तंजौर पर हमला करने वाले मराठा शासकों ने इस मंदिर को बृहदेश्वर नाम दे दिया था।

एक क्लिक पर पढ़ें मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की लेटेस्ट खबरें। Hindi News पढ़ें। MP News, Chhattisgarh news, आज का राशिफल और आज का मौसम से जुड़ी ताजा जानकारी पढ़ें।