उत्तर भारत, मध्य भारत मकर संक्रांति व पंजाब में लोहड़ी की खास रौनक होती है। वहीं, इस दिन दक्षिण भारत में पोंगल का त्यौहार मनाया जाता है। इस साल पोंगल 15 जनवरी 2023 को मनाया जाएगा। इस का संबंध भगवान सूर्य देव और खेती से जुड़ा हुआ है। फसलों के लिए भगवान सूर्य नारायण की विशेष पूजा की जाती है। आस्था और संपन्नता का प्रतीक पोंगल का पर्व चार दिन तक मनाया जाता है। प्रत्येक दिन पोंगल का अलग अलग नाम होता है। पहले दिन भोगी पोंगल, दूसरे दिन सूर्य पोंगल, तीसरे दिन मट्टू पोंगल और चौथे दिन कानुम पोंगल कहते हैं। आइये जानते हैं जानते हैं क्या है भोगी पोंगल और इसका महत्व क्या है।
भोगी पोंगल का महत्व
दक्षिण भारत में मनाया जाने वाले इस त्यौहार की शुरुआत भोगी पोंगल से होती है। पहला दिन भगवान इंद्रदेव को समपर्ति होता है। इस इंद्र पोंगल भी कहा जाता है। इस दिन अच्छी फसल के अच्छी बारिश हो इसलिए इंद्र देव को प्रसन्न किया जाता है। कहते हैं कि इंद्रदेव की पूजा से सुख-समृद्धि और खुशी आती है। भोगी पोंगल का महत्व इसलिए भी है कि इस दिन ही तमिल के नये वर्ष की शुरुआत होती है। इस दिन भोगी पोंगल पर लोग सुबह स्नान करने के बाद भगवान इंद्रदेव की विशेष पूजा अर्चना करते हैं। घरों की सफाई की जाती है। घर से पुरानी व अनुपयोगी वस्तुओं जैसे कबाड़ को बाहर कर दिया जाता है। साफ-सफाई के बाद चावल के सफेद पेस्ट से घर को सजाया जाता है। घर के आंगन व मुख्य द्वार पर कोलम बनाया जाता है और इस जगह पोंगल तैयार किया जाता है। भोगी पोंगल की संध्या पर लोग इकट्ठा होकर भोगी कोट्टम बजाते हुए लोकगीत गाते हैं और एक दूसरे को बधाइयां देते हैं और मिठाइयां खिलाते हैं।
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