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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 04, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Chaitra Navratri 2024: धन से जुड़ी समस्याओं से मुक्ति पाने के लिए नवरात्र में करें ये एक काम, मिलेगा आर्थिक लाभ

मां दुर्गा की कृपा पाने के लिए चैत्र नवरात्र के दौरान पूरी भक्ति-भाव से उनकी पूजा करें। पूजा के दौरान इन मंत्रों का भी जाप करें।

By Ekta SharmaEdited By: Ekta Sharma
Publish Date: Thu, 04 Apr 2024 03:33:42 PM (IST)Updated Date: Thu, 04 Apr 2024 03:33:42 PM (IST)
Chaitra Navratri 2024: धन से जुड़ी समस्याओं से मुक्ति पाने के लिए नवरात्र में करें ये एक काम, मिलेगा आर्थिक लाभ
when is Chaitra Navratri 2024

HighLights

  1. इस साल चैत्र नवरात्र 9 अप्रैल से 17 अप्रैल तक मनाए जाएंगे।
  2. नवरात्र में मां दुर्गा की विधि-विधान से पूजा की जाती है।
  3. पूजा के दौरान कुछ खास मंत्रों का जाप करने से लाभ मिलता है।

धर्म डेस्क, इंदौर। Chaitra Navratri 2024: हर साल चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवमी तिथि तक नवरात्र का त्योहार मनाया जाता है। इस साल चैत्र नवरात्र 9 अप्रैल से 17 अप्रैल तक मनाए जाएंगे। नवरात्र के दिनों में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। नवरात्र में मां दुर्गा की विधि-विधान से पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। साथ ही मां दुर्गा का आशीर्वाद हमेशा बना रहता है। मां दुर्गा की कृपा पाने के लिए चैत्र नवरात्र के दौरान पूरी भक्ति-भाव से उनकी पूजा करें। पूजा के दौरान इन मंत्रों का भी जाप करें। इन मंत्रों के जाप से जीवन में चल रही धन से जुड़ी समस्याएं खत्म होती है और आर्थिक लाभ मिलता है।

माँ दुर्गा मंत्र

ॐ ह्रींग डुंग दुर्गायै नमः

‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै’

आह्वान मंत्र

  • सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
  • शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।।
  • ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।
  • दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।

मां दुर्गा का शक्तिशाली मंत्र

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु शांतिरूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

भय दूर करने हेतु मंत्र

सर्वस्वरुपे सर्वेशे सर्वशक्तिमन्विते ।

भये भ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमो स्तुते ॥

पाप नाशक मंत्र

हिनस्ति दैत्येजंसि स्वनेनापूर्य या जगत् ।

सा घण्टा पातु नो देवि पापेभ्यो नः सुतानिव ॥

मुसीबत से मुक्ति पाने हेतु मंत्र

शरणागत दीनार्त परित्राण परायणे ।

सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमो स्तुते ॥

रोग नाशक मंत्र

रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभिष्टान् ।

त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्माश्रयतां प्रयान्ति ॥

बल प्राप्ति हेतु मंत्र

सृष्टि स्तिथि विनाशानां शक्तिभूते सनातनि ।

गुणाश्रेय गुणमये नारायणि नमो स्तुते ॥

धन प्राप्ति हेतु मंत्र

“दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तो:

स्वस्थै: स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।

दारिद्र्यदु:खभयहारिणि का त्वदन्या

सर्वोपकारकरणाय सदाऽऽ‌र्द्रचित्ता॥”

सौभाग्य प्राप्ति हेतु मंत्र

देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्।

रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥

डिसक्लेमर

'इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।'