धनतेरस पर न खरीदें ये 5 चीजें, पड़ सकता है शनि का प्रकोप; जानें क्या खरीदना होता है बहुत शुभ
धनतेरस पर सोना-चांदी, नए बर्तन, झाड़ू, धनिया के बीज और लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति खरीदना शुभ माना जाता है। वहीं लोहे का सामान, चाकू-कैंची, काली और कांच की चीजें खरीदने से बचने की परंपरा है। ये मान्यताएं हर जगह एक जैसी नहीं हैं।
Publish Date: Thu, 05 Nov 2026 02:37:23 PM (IST)Updated Date: Thu, 05 Nov 2026 02:37:23 PM (IST)
HighLights
- झाड़ू, धनिया और बर्तन खरीदना शुभ
- लोहा, चाकू और कांच से परहेज
- मान्यताएं हर जगह एक जैसी नहीं
धर्म डेस्क। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि यानी धनतेरस (धनत्रयोदशी) से पांच दिवसीय दीपोत्सव का शुभारंभ होता है। इस दिन आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि, धन के देवता कुबेर, विघ्नहर्ता भगवान गणेश और धन-वैभव की देवी मां लक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
धनतेरस पर नए सामानों की खरीदारी की सदियों पुरानी परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन शुभ मुहूर्त में खरीदी गई वस्तुएं घर में सुख, शांति और समृद्धि में 13 गुना वृद्धि करती हैं। हालांकि, खरीदारी के दौरान केवल सोना-चांदी ही नहीं, बल्कि दैनिक जीवन से जुड़ी छोटी-छोटी वस्तुएं भी विशेष महत्व रखती हैं। इसके साथ ही शास्त्रों और लोक-परंपराओं में कुछ खास चीजों को धनतेरस पर खरीदने से बचने की सलाह दी जाती है।
आइए जानते हैं धनतेरस पर क्या खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है और किन वस्तुओं को घर लाने से परहेज करना चाहिए-
धनतेरस पर क्या खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है?
- सोना और चांदी: धनतेरस पर स्वर्ण और रजत धातु की खरीदारी को सर्वोत्तम माना गया है। यदि बड़ा आभूषण लेना संभव न हो, तो अपनी सामर्थ्य के अनुसार एक छोटा चांदी का सिक्का, चम्मच या चांदी का छोटा पात्र भी खरीदा जा सकता है। यह घर में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि का संचार करता है।
- नए बर्तन (पीतल, तांबा और चांदी): पौराणिक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के समय जब भगवान धन्वंतरि प्रकट हुए थे, तब उनके हाथों में अमृत से भरा पीतल का कलश था। इसलिए इस दिन पीतल, तांबे या चांदी के बर्तन खरीदना अत्यंत मंगलकारी माना जाता है।
झाड़ू (दरिद्रता निवारण का प्रतीक): झाड़ू को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि धनतेरस के दिन नई झाड़ू खरीदकर घर लाने से घर की नकारात्मक ऊर्जा, गंदगी और दरिद्रता का नाश होता है तथा सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
साबुत धनिया के बीज (उन्नति और बरकत): धनतेरस पर साबुत धनिया खरीदना बेहद फलदायी माना जाता है। इसे दिवाली पूजन के समय मां लक्ष्मी को अर्पित किया जाता है और बाद में इसके कुछ बीजों को घर के गमले या बगीचे में बो दिया जाता है और शेष को तिजोरी में रखा जाता है। यह आर्थिक उन्नति और संपन्नता का प्रतीक है।
लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां और मिट्टी के दीये: दीपावली की मुख्य पूजा के लिए बैठी हुई मुद्रा में माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की नई मूर्तियां इसी दिन खरीदनी चाहिए। साथ ही घर को रोशन करने के लिए शुद्ध मिट्टी के दीये और पूजन सामग्री घर लानी चाहिए। धनतेरस पर किन चीजों को खरीदने से बचना चाहिए?
पारंपरिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, कुछ विशेष वस्तुओं को धनतेरस के दिन खरीदने से परहेज करने की सलाह दी जाती है-
- लोहे का सामान: ज्योतिष शास्त्र में लोहे का संबंध शनि देव से माना गया है। धनतेरस मां लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि का पावन दिन है, इसलिए इस दिन लोहे के बर्तन, औजार या लोहे से बनी चीजें खरीदने से बचना चाहिए।
चाकू, कैंची और धारदार वस्तुएं: चाकू, कैंची, ब्लेड या अन्य नुकीले और धारदार उपकरण खरीदने से परहेज करें। लोक-मान्यताओं में धारदार वस्तुएं कलह, अलगाव और नकारात्मक प्रभाव का प्रतीक मानी जाती हैं।
कांच का सामान: कांच का संबंध राहु ग्रह से माना जाता है और इसके टूटने की संभावना अधिक होती है। टूटने वाली वस्तुएं स्थायित्व की कमी का संकेत देती हैं, इसलिए इस दिन कांच के बर्तन या सजावटी सामान खरीदने से बचना चाहिए।
काले रंग की वस्तुएं: शुभ मांगलिक अवसरों पर काले रंग के कपड़े या काले रंग की अन्य सामग्री खरीदने से परहेज करना चाहिए। हिंदू परंपरा में पूजा और मांगलिक अवसरों पर पीला, लाल, नारंगी जैसे चमकीले रंगों को प्राथमिकता दी जाती है।
खाली बर्तन घर लाना: यदि आप धनतेरस पर कोई भी नया पात्र या बर्तन खरीद रहे हैं, तो उसे बिल्कुल खाली घर के भीतर न लाएं। दुकान से लाते समय या घर की चौखट पर प्रवेश करते समय उसमें थोड़ा सा जल, चावल, बताशा या कोई मीठी सामग्री रख लेना बेहद शुभ और बरकत देने वाला माना जाता है।