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बड़ी आंखें, बड़े कान और विशाल पेट... गणेशजी के स्वरूप का हर अंग देता है सफल जीवन का संदेश

श्रीजी का स्वरूप हमें बताता है कि सफलता केवल बुद्धि से नहीं मिलती। इसके लिए एकाग्रता, धैर्य, संयम, सुनने की क्षमता, परिस्थितियों के अनुसार ढलने की कला...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Rajdil Shivhare
Publish Date: Sun, 13 Sep 2026 06:40:39 PM (IST)Updated Date: Sun, 13 Sep 2026 06:41:24 PM (IST)
बड़ी आंखें, बड़े कान और विशाल पेट... गणेशजी के स्वरूप का हर अंग देता है सफल जीवन का संदेश

HighLights

  1. बड़े कान और छोटा मुख: अधिक सुनें, सोच-समझकर बोलें
  2. सूंड और विशाल पेट: लचीलापन और धैर्य रखने की सीख
  3. मूषक वाहन: चंचल मन और इच्छाओं पर नियंत्रण का प्रतीक

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। गणेश चतुर्थी पर घर-घर और पंडालों में विराजने वाले विघ्नहर्ता श्रीगणेश का स्वरूप जितना आकर्षक है, उतना ही गहरा इसका आध्यात्मिक और जीवनोपयोगी संदेश भी है। गणेशजी की बड़ी आंखों से लेकर बड़े कान, लंबी सूंड, विशाल पेट और छोटे मुख तक उनके स्वरूप का हर अंग मनुष्य को जीवन का एक महत्वपूर्ण पाठ पढ़ाता है। यही वजह है कि गणेश जी को केवल बुद्धि और शुभता का देवता नहीं, बल्कि व्यवहारिक जीवन की सीख देने वाला स्वरूप भी माना जाता है।

उनका स्वरूप हमें बताता है कि सफलता केवल बुद्धि से नहीं मिलती। इसके लिए एकाग्रता, धैर्य, संयम, सुनने की क्षमता, परिस्थितियों के अनुसार ढलने की कला और अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण भी जरूरी है। यही कारण है कि गणेश उत्सव केवल पूजा और उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि अपने जीवन में इन गुणों को अपनाने का भी समय है।


बड़ी आंखें... संदेश- लक्ष्य पर रखें नजर

गणेश जी की बड़ी आंखें एकाग्रता और दूरदृष्टि का संदेश देती हैं। जीवन में लक्ष्य कितना भी कठिन क्यों न हो, यदि नजर लक्ष्य पर टिकी रहे तो रास्ते की बाधाएं कमजोर पड़ने लगती हैं। बड़ी आंखें यह भी समझाती हैं कि किसी भी परिस्थिति को केवल ऊपर-ऊपर से नहीं, बल्कि गहराई से देखने और समझने की जरूरत है।

बड़े कान... संदेश- पहले सुनें, फिर बोलें

गणेश जी के बड़े कान सबसे महत्वपूर्ण संदेश देते हैं, अधिक सुनना और कम बोलना। जीवन में कई विवाद केवल इसलिए पैदा होते हैं, क्योंकि हम सामने वाले की बात पूरी तरह सुने बिना अपनी बात रखने लगते हैं। बड़े कान धैर्यपूर्वक सुनने, अच्छी बातों को ग्रहण करने और अनावश्यक बातों को नजरअंदाज करने की सीख देते हैं।

छोटा मुख... संदेश- बोलें कम, सोचें ज्यादा

बड़े कानों के साथ गणेश जी का छोटा मुख भी खास संदेश देता है। यह संकेत करता है कि व्यक्ति को बोलने से पहले विचार करना चाहिए। शब्दों का चयन सोच-समझकर किया जाए तो रिश्तों में मिठास बनी रहती है और कई अनावश्यक विवादों से बचा जा सकता है।

लंबी सूंड... संदेश- परिस्थितियों के अनुसार ढलने की सीख

गणेश जी की सूंड उनके स्वरूप का सबसे अनोखा अंग है। यह सूक्ष्म से सूक्ष्म वस्तु को उठाने और आवश्यकता पड़ने पर भारी वस्तु को हटाने में सक्षम मानी जाती है। यही मनुष्य को परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढालने का संदेश देती है। जीवन में सफलता के लिए केवल ताकत ही नहीं, बल्कि लचीलापन और समझदारी भी जरूरी है।

विशाल पेट... संदेश- हर परिस्थिति को पचाने की क्षमता

गणेश जी का बड़ा पेट धैर्य और संतोष का प्रतीक माना जाता है। जीवन में मिलने वाली अच्छी-बुरी परिस्थितियों को सहजता से स्वीकार करना और नकारात्मक अनुभवों को अपने ऊपर हावी न होने देना जरूरी है। विशाल उदर हमें सिखाता है कि हर बात को तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय उसे धैर्य से संभालना चाहिए।

एकदंत... संदेश- अच्छाई को अपनाने का संदेश

गणेश जी के एक दांत का स्वरूप भी विशेष अर्थ रखता है। इसे इस संदेश से जोड़ा जाता है कि जीवन में अच्छी बातों को अपनाकर नकारात्मकता को पीछे छोड़ना चाहिए। परिस्थितियां चाहे जैसी हों, सकारात्मक सोच और दृढ़ता के साथ आगे बढ़ना ही सफलता का रास्ता बनाती है।

छोटे पैर... संदेश- जमीन से जुड़े रहने की सीख

गणेश जी के छोटे पैर यह संदेश देते हैं कि ऊंचाई हासिल करने के बाद भी अपनी जड़ों से जुड़े रहना चाहिए। व्यक्ति कितना भी सफल क्यों न हो जाए, उसे विनम्रता नहीं छोड़नी चाहिए। सफलता के साथ सरलता और व्यवहार में सहजता ही व्यक्तित्व को बड़ा बनाती है।

वाहन मूषक... संदेश- इच्छाओं पर नियंत्रण

गणेश जी का वाहन मूषक भी गहरा संदेश देता है। मूषक को चंचल मन और इच्छाओं का प्रतीक माना जाता है। गणेश जी का उसके ऊपर विराजमान होना संकेत करता है कि मनुष्य को अपनी इच्छाओं और मन पर नियंत्रण रखना चाहिए। इच्छाएं यदि नियंत्रण में रहें तो बुद्धि सही दिशा में काम करती है।