Gayatri Mantra: अगर आपका मन अशांत रहता है। यदि आप मानसिक तौर पर बीमार हैं। किसी भी चीज में आपका मन नहीं लगता है। अंदर ही अंदर आप किसी बात से दुखी रहते हैं या फिर आप पूरी तरह से खुश नहीं हैं तो आज हम आपको एक रामबाण के बारे में बताने जा रहे हैं। आपने बचपन से आज तक स्कूल, घर या अन्य कई धार्मिक स्थानों में गायत्री मंत्र सुनना होगा। यह कोई सामान्य मंत्र नहीं है। बल्कि चार वेदों का सार इसमें समाहित है। सनातन धर्म में आस्था रखने वालों के लिए इस मंत्र को सबसे पवित्र माना गया है। सनातन शास्त्रों के अनुसार यह वेदों का श्रेष्ठ मंत्र है। इस मंत्र में 24 अक्षर हैं जिन्हें 24 देवी-देवताओं का स्मरण बीज माना जाता है। यही 24 अक्षर वेद व शास्त्रों के ज्ञान का आधार भी बताये जाते हैं। आइये जानते हैं क्या है गायत्री मंत्र का सरल अर्थ और इसके जाप का सबसे अच्छा समय।

गायत्री मंत्र जाप का सही समय

1.पहला समय है सूर्योदय से ठीक पहले, जिसे सूर्योदय के बाद तक करना चाहिए।

2.दूसरा समय दोपहर का होता है।

3.तीसरा समय है सूर्यास्त से ठीक पहले और सूर्यास्त के बाद तक करना चाहिए।

4. गायत्री मंत्र जपने का सर्वथा उपयुक्‍त समय सुबह सूर्योदय से पहले और संध्‍याकाल में होता है।

5. रात को सोने से पहले कभी भी गायत्री मंत्र का जप नहीं करना चाहिए।

गायत्री मंत्र और अर्थ

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥

ऊँ का अर्थ है ईश्वर, भू: का अर्थ प्राणस्वरूप, भुव: दुखों का नाश करने वाला अर्थात दुखनाशक, स्व: सुख का स्वरुप अर्थात सुख स्वरूप, तत् का तात्पर्य है उस, सवितु: का अभिप्राय है तेजस्वी, वरेण्यं कहते हैं श्रेष्ठ को, भर्ग: का अर्थ लिया जाता है पापनाशक, देवस्य देवताओं का अर्थात दिव्य, धीमहि धारण करने को कहते हैं, धियो का मतलब है बुद्धि, यो का अर्थ जो, न: का तात्पर्य है हमारी, प्रचोदयात् को कहते हैं प्रेरित करें।

मंत्र का अभिप्राय

प्राणस्वरुप, दु:ख नाशक, सुख स्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देव स्वरूप परमात्मा को हम अन्तरात्मा में धारण करें। वह ईश्वर हमारी बुद्धि को सन्मार्ग पर प्रेरित करे।

कब करें गायत्री मंत्र का जाप

गायत्री मंत्र का जाप चाहें तो चौबीसों घंटे किया जा सकता है लेकिन मुख्यत तीन समय गायत्री मंत्र का जाप करने की सलाह दी जाती है। सबसे पहले प्रात:काल सूर्योदय से थोड़ा पहले गायत्री मंत्र का जाप शुरू करना चाहिए व सूर्योदय तक मंत्र का जाप जारी रखें। इसके बाद दोपहर के समय भी गायत्री मंत्र का जाप किया जा सकता है। तत्पश्चात सूर्यास्त से थोड़ा पहले मंत्रोच्चारण करें व सूर्यास्त के बाद तक जारी रखें। इन तीन अवसरों के अलावा यदि गायत्री मंत्र का जाप करना चाहें तो मन ही मन गायत्री मंत्र का जाप कर सकते हैं।

डिसक्लेमर

'इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।

Posted By: Navodit Saktawat

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