ज्योतिष के अनुसार प्रत्येक ग्रह की महादशा का एक निश्चित समय होता है। इन महादशा का व्यक्ति जीवन पर उतने ही समय के लिए प्रभाव पड़ता है। यह इस बात पर निर्भर करता है की जातक की कुंडली में वह ग्रह किस स्थिति में बैठा हुआ है। आज हम गुरु की महादशा के बारे में कुछ बताने जा रहे हैं। गुरु की महादशा 16 साल तक चलती है। यदि गुरु आपकी कुंडली मजबूत स्थिति में है तो आप भाग्यशाली हैं। इसका प्रभाव आपके जीवन पर सकारात्मक देखने को मिलेगा। आइए जानते हैं गुरु की महादशा का जीवन में प्रभाव और उपाय…

क्‍या है गुरु की महादशा

गुरु की महादशा में गुरु की अन्तर्दशा का फल

गुरु ग्रह की महादशा में गुरु की अन्तर्दशा के फलस्वरुप आपको सौभाग्य की प्राप्ति होगी। समाज में मान-सम्मान बढ़ता है। पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है। मन की आकांक्षाऐं पूरी होती हैं।

गुरु की महादशा में शनि की अन्तर्दशा का फल

गुरु ग्रह की महादशा में शनि की अन्तर्दशा के फलस्वरुप जातक सांसारिक उन्नति करता है। वेश्यों की संगति में आता है। शराब का शौकीन बनता है। धन अधिक खर्च होता है। हृदय में सदैव भय बना रहे। आंखों में रोग हो और पुत्र को पीड़ा होती है।

गुरु की महादशा में बुध को अन्तर्दशा का फल

गुरु की महादशा में बुध को अन्तर्दशा के फलस्वरुप जातक शराब, जुएं और वैश्यावृत्ति जैसे गलत कृत्यों में फंस जाता है। नात, पित्त, कफ तीनों दोषों के कारण जातक बीमार होता है।

गुरु का जीवन पर प्रभाव

गुरु की महादशा से जातक के जीवन में कई परिवर्तन आते हैं। ऐसे व्यक्ति का पूजा-पाठ में मन लगाता है। शिक्षा में अव्वल रहता है। धन की कमी नहीं होती। आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पडता। आशावादी सोच के साथ सभी काम आसानी से सपन्न करने में सक्षम हो जाता है। ईमानदार और ज्ञानी होता है। संतान का सुख भी मिलता है। ऐसा व्यक्ति ज्योतिष और शिक्षा के क्षेत्र में अच्छा काम कर सकता है।

गुरु का जीवन पर दुष्प्रभाव

यदि गुरु आपकी जन्म कुंडली में अशुभ स्थिति में तो आपके जीवन में अनेकों चुनौतियां आने वाली है। पूजा-पाठ से मन दूर भागेगा। बीमारियां आपको घेरने लगेंगी। जैसे व्यक्ति को पेट से सबंधित रोग, अपच, पेट दर्द, एसिडिटी, कमज़ोर पाचन तंत्र, कैंसर जैसी बीमारी होने का ख़तरा रहता है। व्यक्ति को वैवाहिक जीवन का सुख प्राप्त नहीं होता है और विवाह होने में बाधा आती है।

गुरु ग्रह के उपाय

1- बृहस्पतिवार का व्रत रखें। भगवान बृहस्पति देव की उपासना करें।

2- नहाने के पानी में हल्दी डालकर, उस पानी से नहाएं।

3- गुरुवार के दिन मंदिर जाकर केले के पेड़ की पूजा करें।

4- केले के पेड़ पर हल्दी, गुड़ और चने की दाल चढ़ाएं।

5- गुरुवार के दिन गरीबों या जरूरतमंदों को पीली चने की दाल, केले और पीली मिठाई दान करें।

6- देवानाम च ऋषिणाम च गुरुं कांचन सन्निभम।बुद्धिभूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पतिम्।। इस मंत्र का जाप करें

डिसक्लेमर

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Posted By: Navodit Saktawat

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