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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 05, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Lord Ganesh Puja: बुधवार के दिन करें इस चमत्कारी स्तोत्र का पाठ, घर में आएगी सुख-समृद्धि

बुधवार के दिन भगवान गणेश की पूजा करते समय श्री गणेश पंच रत्न स्तोत्र का पाठ जरूर करना चाहिए। ऐसा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

By Ekta SharmaEdited By: Ekta Sharma
Publish Date: Tue, 05 Mar 2024 02:19:58 PM (IST)Updated Date: Tue, 05 Mar 2024 02:19:58 PM (IST)
Lord Ganesh Puja: बुधवार के दिन करें इस चमत्कारी स्तोत्र का पाठ, घर में आएगी सुख-समृद्धि
Ganesh Pancharatna Stotram benefits

HighLights

  1. भगवान गणेश की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
  2. बुधवार को श्री गणेश पंच रत्न स्तोत्र का पाठ जरूर करना चाहिए।
  3. ऐसा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

धर्म डेस्क, इंदौर। Lord Ganesh Puja: हिंदू धर्म में सप्ताह का हर दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित माना जाता है। वहीं, बुधवार का दिन भगवान श्रीकृष्ण के साथ-साथ भगवान गणेश को भी समर्पित है। इस दिन भगवान कृष्ण और भगवान गणेश की विधि-विधाने से पूजा की जाती है और उनके निमित्त व्रत रखा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान गणेश की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

बुधवार के दिन भगवान गणेश की पूजा करते समय श्री गणेश पंच रत्न स्तोत्र का पाठ जरूर करना चाहिए। ऐसा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। साथ ही भगवान गणेश की कृपा हमेशा साधक पर बनी रहती है। श्री गणेश पंच रत्न स्तोत्र इस प्रकार है।


'श्री गणेश पंच रत्न स्तोत्र'

''मुदाकरात्तमोदकं सदा विमुक्तिसाधकं

कलाधरावतंसकं विलासिलोकरक्षकम् ।

अनायकैकनायकं विनाशितेभदैत्यकं

नताशुभाशुनाशकं नमामि तं विनायकम् ॥॥

नतेतरातिभीकरं नवोदितार्कभास्वरं

नमत्सुरारिनिर्जरं नताधिकापदुद्धरम् ।

सुरेश्वरं निधीश्वरं गजेश्वरं गणेश्वरं

महेश्वरं तमाश्रये परात्परं निरन्तरम् ॥॥

समस्तलोकशंकरं निरस्तदैत्यकुञ्जरं

दरेतरोदरं वरं वरेभवक्त्रमक्षरम् ।

कृपाकरं क्षमाकरं मुदाकरं यशस्करं

मनस्करं नमस्कृतां नमस्करोमि भास्वरम् ॥॥

अकिंचनार्तिमार्जनं चिरन्तनोक्तिभाजनं

पुरारिपूर्वनन्दनं सुरारिगर्वचर्वणम् ।

प्रपञ्चनाशभीषणं धनंजयादिभूषणम्

कपोलदानवारणं भजे पुराणवारणम् ॥॥

नितान्तकान्तदन्तकान्तिमन्तकान्तकात्मजं

अचिन्त्यरूपमन्तहीनमन्तरायकृन्तनम् ।

हृदन्तरे निरन्तरं वसन्तमेव योगिनां

तमेकदन्तमेव तं विचिन्तयामि सन्ततम् ॥॥

महागणेशपञ्चरत्नमादरेण योऽन्वहं

प्रजल्पति प्रभातके हृदि स्मरन् गणेश्वरम् ।

अरोगतामदोषतां सुसाहितीं सुपुत्रतां

समाहितायुरष्टभूतिमभ्युपैति सोऽचिरात्'' ॥॥

'श्री गणेश स्तुति'

''ॐ श्री गणेशाय नम:।

ॐ गं गणपतये नम:।

ॐ वक्रतुण्डाय नम:।

ॐ हीं श्रीं क्लीं गौं ग: श्रीन्महागणधिपतये नम:।

ॐ विघ्नेश्वराय नम:।

गजाननं भूतगणादि सेवितं, कपित्थ जम्बूफलसार भक्षितम्।

उमासुतं शोक विनाशकारणं, नमामि विघ्नेश्वर पादपंकजम्''।

डिसक्लेमर

'इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।'