क्या पितृ पक्ष में सचमुच भारी पड़ता है नया सामान खरीदना? जानें शास्त्रों में छिपा वो सच जो अक्सर लोग नहीं जानते
पूर्वजों के तर्पण और श्राद्ध के लिए समर्पित पितृ पक्ष के दौरान नई चीजें खरीदने को लेकर अक्सर असमंजस रहता है। जानिए धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि...और पढ़ें
By Akriti KumariEdited By: Akriti Kumari
Publish Date: Sun, 13 Sep 2026 11:29:46 AM (IST)Updated Date: Sun, 13 Sep 2026 11:29:46 AM (IST)
पितृ पक्ष के दौरान नए कपड़े, गाड़ी या प्रॉपर्टी खरीदने के नियम। (AI जनरेटेड) धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में भाद्रपद मास की पूर्णिमा से लेकर आश्विन मास की अमावस्या तक का 16 दिनों का समय 'पितृ पक्ष' (श्राद्ध पक्ष) के रूप में जाना जाता है। यह समय हमारे पूर्वजों (पितरों) के प्रति श्रद्धा, तर्पण, पिंड दान और आभार व्यक्त करने के लिए समर्पित होता है।
पितृ पक्ष के दौरान नई चीजों की खरीदारी और शुभ कार्यों को लेकर श्रद्धालुओं के मन में अक्सर असमंजस रहता है। आइए जानते हैं शास्त्रों और धार्मिक परंपराओं के अनुसार पितृ पक्ष में खरीदारी और रहन-सहन के क्या नियम बताए गए हैं-
क्या पितृ पक्ष में खरीदारी की जा सकती है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष में नई चीजों की खरीदारी पर पूरी तरह से पाबंदी या निषेध नहीं है। हालांकि, खरीदारी के उद्देश्य और वस्तुओं के प्रकार पर ध्यान देना बेहद जरूरी है-
- गहने (सोना-चांदी), नए वस्त्र, वाहन (Car/Bike), नया मकान, जमीन-जायदाद या लोहे से बनी बड़ी वस्तुओं की खरीदारी से बचना चाहिए।
- पितृ पक्ष का समय भौतिक सुख-सुविधाओं और दिखावे का नहीं, बल्कि सादगी, संयम और पूर्वजों के स्मरण का होता है।
- दैनिक जीवन की अति-आवश्यक वस्तुएं, दवाइयां, राशन या आपातकालीन खरीदारी करने में कोई धार्मिक दोष नहीं माना जाता।
इस दौरान क्यों नहीं होते मांगलिक कार्य?
पितृ पक्ष में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन संस्कार, सगाई और नए व्यापार का शुभारंभ जैसे मांगलिक- उत्सव से जुड़े कार्य पूरी तरह वर्जित माने जाते हैं।
- मांगलिक कार्यों में उल्लास, उत्सव और भौतिक खुशियों का माहौल होता है, जबकि पितृ पक्ष का वातावरण शांत, गंभीर, संयमित और पितरों की आत्मा की शांति के लिए समर्पित होता है। इसलिए इस समय उत्सव मनाने वाले कार्यों को टाल दिया जाता है।
पहनावे (वस्त्रों) का रखें विशेष ध्यान
- श्राद्ध, तर्पण या पितृ पूजा के दौरान सादे और सात्विक कपड़े पहनना अति उत्तम माना गया है।
- इस दौरान सफेद, हल्के पीले या अन्य सौम्य रंगों के वस्त्र पहनें।
- चटक (डार्क), अत्यधिक भड़कीले या काले रंग के कपड़ों के प्रयोग से बचना चाहिए।
पितृ पक्ष के दौरान रखें इन 5 मुख्य नियमों का ध्यान
- बाल और दाढ़ी न कटवाएं: शास्त्रों के अनुसार श्राद्ध पक्ष की अवधि में बाल, दाढ़ी और नाखून कटवाने से बचना चाहिए।
- तामसिक भोजन का पूर्ण त्याग: मांस, मछली, अंडे, प्याज, लहसुन और मदिरा (शराब) जैसे तामसिक पदार्थों का सेवन भूलकर भी न करें।
- गृह क्लेश से बचें: घर में शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल बनाए रखें। लड़ाई-झगड़े और कटु वचनों से बचें।
- पशु-पक्षियों की सेवा: कौए, गाय, कुत्ते और चींटियों को भोजन-पानी जरूर दें। माना जाता है कि पितर इन्हीं माध्यमों से अपना भाग ग्रहण करते हैं।
- असहायों का सम्मान: किसी गरीब, बुजुर्ग या असहाय व्यक्ति का अपमान न करें और द्वार पर आए अतिथि या याचक को खाली हाथ न लौटाएं।
(नोट: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं, शास्त्रों और लोक परंपराओं पर आधारित है।)
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