धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सितंबर महीने का पहला प्रदोष व्रत भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाएगा। यह व्रत शिव जी की कृपा प्राप्ति के लिए उत्तम है, जिसे स्त्री व पुरुष दोनों ही कर सकते हैं। प्रदोष व्रत हर महीने में आने वाली दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि पर रखा जाता है। इस प्रकार हर महीने दो बार प्रदोष व्रत किया जाता है। ऐसी माना जाता है कि इस व्रत को करने से धन की कोई कमी नहीं रहती है, साथ ही दुख, दरिद्रता और क्लेश जीवन से दूर हो जाते हैं।
भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 5 सितंबर को प्रातः 4 बजकर 8 मिनट पर शुरू हो रही है। वहीं इस तिथि का समापन 6 सितंबर को प्रातः 3 बजकर 12 मिनट पर होने जा रहा है। ऐसे में प्रदोष व्रत शुक्रवार 5 सितंबर को किया जाएगा। शुक्रवार का दिन पड़ने की वजह से इसे शुक्र प्रदोष व्रत (Shukra Pradosh Vrat 2025) भी कहा जाएगा। इस दौरान पूजा के लिए शाम 6:38 से रात 8:55 बजे तक का समय शुभ रहेगा।
शुक्र प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर व्रत का संकल्प लें और फिर स्नान करें।
मंदिर की अच्छी तरह साफ-सफाई करें और गंगाजल का छिड़काव करें।
एक चौकी पर साफ-सुथरा लाल रंग का कपड़ा बिछाएं और शिव-पार्वती जी की मूर्ति स्थापित करें।
शिव जी का अभिषेक करने के लिए कच्चे दूध, गंगाजल, और शुद्ध जल का इस्तेमाल करें।
अब पूजा में महादेव को बेलपत्र, धतूरा और भांग आदि अर्पित करें।
शिव जी को भोग के रूप में खीर, फल, हलवा अर्पित करें।
माता पार्वती को 16 शृंगार की सामग्री अर्पित करें।
शिव चालीसा का पाठ करें।
दीपक जलाकर भगवान शिव व माता पार्वती की आरती व मत्रों का जप करें।
आखिर में सभी लोगों में प्रसाद बांटें।
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