Punsavan Sanskar: गर्भस्थ शिशु में संस्कारों का रोपण कैसे करें,क्या है पुंसवन संस्कार
Punsavan Sanskar: जीवन को उत्कर्ष तक ले जाने के लिए होता है संस्कार।
By Manoj Kumar Tiwari
Edited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Tue, 02 May 2023 08:15:20 AM (IST)
Updated Date: Tue, 02 May 2023 08:15:20 AM (IST)

Punsavan Sanskar: सनातन संस्कृति में संस्कारों का अति विशेष महत्व है जन्म से मृत्यु पर्यंत संस्कार के सुव्यवस्थित आचरण को आलिंगन करते हुए इस मनुष्य देह की यात्रा मंगल मय होती है। इसी कड़ी में पंडित रवि दुबे जी का कहना है की आज के इस भौतिकवादी युग में हमें संस्कारों का पालन करना कठिन प्रतीत होता है पर संस्कारों का पालन करना अनिवार्य व आवश्यक भी है जीवन को उत्कर्ष तक ले जाने के लिए होता है संस्कार।
संस्कार प्रयोजन-गर्भ सुनिश्चित हो जाने पर या तीन माह पूरे हो जाने तक पुंसवन संस्कार कर देना चाहिए। विलम्ब से भी किया जाय, तो दोष नहीं, किन्तु समय पर कर देने का लाभ विशेष होता है। तीसरे माह से गर्भ में आकार और संस्कार दोनों अपना स्वरूप पकड़ने लगते हैं। अस्तु, उनके लिए आध्यात्मिक उपचार समय पर ही कर दिया जाना चाहिए। इस संस्कार के नीचे लिखे प्रयोजनों को ध्यान में रखा जाए।
गर्भ का महत्त्व समझें,वह विकासशील शिशु, माता-पिता, कुल- परिवार तथा समाज के लिए विडम्बना न बने,सौभाग्य और गौरव का कारण बने। गर्भस्थ शिशु के शारीरिक, बौद्धिक तथा भावनात्मक विकास के लिए क्या किया जाना चाहिए, इन बातों को समझा-समझाया जाए।
गर्भिणी के लिए अनुकूल वातावरण खान-पान, आचार-विचार आदि का निर्धारण किया जाए। गर्भ के माध्यम से अवतरित होने वाले जीव के पहले वाले कुसंस्कारों के निवारण तथा सुसंस्कारों के विकास के लिए, नये सुसंस्कारों की स्थापना के लिए अपने सङ्कल्प, पुरुषार्थ एवं देव अनुग्रह के संयोग का प्रयास किया जाए।
पुंसवन संस्कार की इस तरह करे तैयारी
1 औषधि अवघ्राण के लिए वट वृक्ष की जटाओं के मुलायम सिरों का छोटा टुकड़ा, गिलोय, पीपल की कोंपल (मुलायम पत्ते) लाकर रखे जाएँ। सबका थोड़ा-थोड़ा अंश पानी के साथ सिल पर पीसकर एक कटोरी में उसका घोल तैयार रखा जाए।
2 साबूदाने या चावल की खीर तैयार रखी जाए। जहाँ तक सम्भव हो, इसके लिए गाय का दूध प्रयोग करें। खीर गाढ़ी हो।
“तैयार हो जाने पर निर्धारित क्रम में मङ्गलाचरण, षट्कर्म, सङ्कल्प, यज्ञोपवीत परिवर्तन, कलावा-तिलक एवं रक्षाविधान तक का यज्ञीय क्रम पूरा कर पुंसवन संस्कार कराए।