
सांस्कृतिक दृष्टि से त्योहार भारतीय जनमानस प्रेम उल्लास औऱ आनंद के पर्याय हैं। यहां अनेक त्योहार मनाए जाते हैं लेकिन रंगों के त्योहार होली की बात ही कुछ निराली है।
इस त्योहार में जहां लोग एक दूसरे को रंग और गुलाल लगाते है वहीं खुशी के वातावरण में साल भर की कटुता को भूलकर प्रेम में डूब जाते हैं। इस दिन ढोलक की थाप और मजीरों की झनकारे पर होली के गीत भी गाए जाते हैं।ऐसे ही कुछ गीत हैं-
गीत - 1
आज बिरज में होरी रे रसिया। होरी तो होरी बरजोरी रे रसिया।।
उड़त अबीर गुलाल कुमकुमा, केशर की पिचकारी रे रसिया। आज...
उतते ग्वाल बाल सब आवत, इत वृषभान दुलारी रे रसिया। आज...
बाजत बीन मृदंग पखावज, गावत दे दे तारी रे रसिया। आज...
श्याम श्यामली खेलें होरी, अद्भुत रूप तिहारों रे रसिया। आज...
अपने अफने घर से निकली, कोई गोरी कोई कारी रे रसिया।। आज ब्रज में ...
गीत - 2
मथुरा की कुंज गलिन में, होरी खेल रहे नंदलाल।
मोहे भर पिचकारी मारी, साड़ी की आब उतारी।
झूमर को कर दियो नाश।। मथुरा की...
मोरे सिर पर धरी कमोरी, मोसे बहुत करी बरजोरी।
मोरे मुख पर मलो गुलाल।
मथुरा की कुंज गलिन में, होली खेल रहे नंदलाल।
गीत - 3
होली आई रे, आई रे, होली आई रे।
झूमती गाती रंग बरसाती, होली आई रे...
निकल पड़ी गोरी अब घर से,
मारें पिचकारी रंग भर भर के, होली आई रे...
तन रंग डाला, मन रंग डाला,
अबीर लगाओ जी भर के। होली आई रे...
घूंघट लगाओ गोरी, मुखड़ा दिखाओ,
दूर मत जाओ गोरी डर डर के। होली आई रे...
गीत - 4
होली खेलन आयो श्याम,
आज याको रंग में बोरो रे। होली खेलन...
कोरे कोरे कलश मंगाय सखी री,
उसमें केसर घोरी रे। होली खेलन...
मुख पै मल्यो गुलाल सखी री,
कीन्हों काले ते गोरी रे। होली खेलन...
हरे हरे बांस की पोरी सखी री,
छीन छपट करी चोरी रे। होली खेलन...
लोक लाज कुल की मर्यादा,
सखी! फागुन में छोड़ी रे। होली खेलन...
गीत - 5
होली आई रे कन्हाई, ब्रज के रसिया, होली आई रे।
बाट तकें सब सखा तुम्हारे, बाहर आओ मोहन प्यारे,
डफ बजने दो रंग उड़ने दो, अब क्यों देर लगाई रसिया।। होली आई रे...
कलश मंगाय के केसर घोलो, श्याम हमें आज रंग में बोरो
होली आ गई ओ मन बसिया, रंग अबीर उड़ाओ रसिया।। होली आई रे...