Vaidik Mantra: मेडिकल साइंस आज इतनी तरक्की कर चुका है कि गंभीर से गंभीर बीमारी का इलाज हो पाना संभव हो चुका है। लेकिन कई बार दवाओं के साथ आपको योग, आयुर्वेद, ग्रंथों द्वारा बताए उपचार एवं वैदिक मंत्रों का सहारा भी लेना पड़ता है। आज इस आर्टिकल में हम ऐसे ही कुछ वैदिक मंत्रों के बारे में बात करेंगे जिनके नियमित जाप करने से गंभीर से गंभीर बीमारियां भी ठीक हो सकती हैं। लेकिन ध्यान रखें कि इन मंत्रों के जप के दौरान दवाइयां खाना या फिर चिकित्सीय सलाह को फॉलो करना बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें।
अकाल मृत्यु से बचाव का मंत्र
शास्त्रों के अनुसार, महामृत्युंजय मंत्र को चमत्कारी मंत्र कहा जाता है। इस मंत्र का जाप करने से रोग, दोष और भय से मुक्ति मिल जाती है। ऐसी मान्यता है कि इस मंत्र का जाप करने से अकाल मृत्यु का डर खत्म हो जाता है। यदि कोई व्यक्ति ऐसी गंभीर बीमारी से पीड़ित है जहां चिकित्सीय उपचार भी उसे ठीक कर पाने में सफल नहीं हो पा रहा है, तो ऐसे स्थिति में " ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ" का जाप कराया जाता है।
दुर्गा मंत्र का लाभ
किसी भी व्यक्ति को सदैव सेहतमंद रहने के लिए अच्छा खान-पान सही दिनचर्या रखने के साथ ही वैदिक मंत्रों का जाप करना चाहिए। मंत्र मन को शुद्धि करने के साथ ही कई प्रकार के शारीरिक लाभ देते हैं। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार स्वास्थ्य लाभ के लिए नियमित रूप से दुर्गा सप्तशती में बताये गए मंत्र का जप करें। प्रात: ऊन के आसन पर बैठकर 108 बार ‘ देहि सौभाग्यमारोग्यं, देहि मे परमं सुखं। रूपं देहि, जयं देहि, यशो देहि, द्विषो जहि’का जप करें। इस मंत्र के जाप के साथ ही देवी मां से प्रार्थना करें कि वह आपको अच्छी सेहत का वरदान दें।
हृदय रोग का मंत्र
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि कोई व्यक्ति हृदय रोग से पीड़ित है, तो दवाईयां लेने के साथ वैदिक मंत्रों के जाप से जल्दी ठीक हो सकता है। ऋग्वेद में वर्णित मंत्र‘ क्क घन्नघ मित्रामहः आरोहन्नुत्तरां दिवम्। हृद्रोग मम् सूर्य हरि मांण् च नाश्यं’ का नियमित जाप करना हृदय रोग के लिए लाभदायक बताया गया है। लेकिन ध्यान रखें कि इस मंत्र का जप प्रातःकाल प्रतिदिन सूर्योदय के समय सूर्यदेव के सामने मुख करके 108 बार किया जाना चाहिए। बता दें कि यदि मरीज की स्थिति मंत्र जाप करने लायक नहीं है, तो यह कार्य किसी पंडित, पुरोहित या घर के किसी सदस्य द्वारा कराया जा सकता है।
निरोगी रहने का मंत्र
‘क्क जूं सः माम्पालय पालय सः जूं क्क’यदि इस मंत्र का नियमित जाप किया जाए तो व्यक्ति सदैव निरोगी रहता है। इस मंत्र का जाप ऊन के आसन पर उत्तर दिशा की ओर मुख करके किया जाता है। मंत्र जाप से पहले भगवान शिव का ध्यान करना आवश्यक है, क्योंकि यह मंत्र उन्हें को समर्पित माना गया है। मंत्र जाप रुद्राक्ष की माला के द्वारा किया जाना चाहिए। इस मंत्र के नियमित जाप से व्यक्ति की सभी शारीरिक व्याधियां दूर हो जाती हैं।
गंभीर रोग का मंत्र
यदि कोई व्यक्ति किसी गंभीर रोग से पीड़ित है, तो चिकित्सीय उपचार लेने के साथ ही गायत्री मंत्र ‘ऊं भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो न: प्रचोदयात्’ का जप करना चाहिए। ध्यान रखें प्रतिदिन कम से कम पांच माला और अधिक से अधिक आठ माला जप पूरी श्रद्धा और निष्ठा के साथ करें। ऐसा कहा जाता है कि इस मंत्र जप से गंभीर से गंभीर बीमारियों से राहत मिल सकती है।
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