धर्म डेस्क, इंदौर। सनातन धर्म में तुलसी पूजन का विशेष महत्व है। पौराणिक मान्यता है कि तुलसी पूजन से भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी जल्द प्रसन्न होते हैं। यदि किसी व्यक्ति के जीवन में आर्थिक संकट है और कई परेशानियों से जूझ रहा है तो उसे रोज विधि-विधान के साथ तुलसी पूजन जरूर करना चाहिए। पंडित चंद्रशेखर मलतारे के मुताबिक, रोज सुबह नित्यकर्म के बाद तुलसी माता का पूजन करने के बाद इन मंत्रों का जाप करने से शुभ फल मिलता है। इन तुलसी मंत्रों का जाप करने से जगत के पालनहार भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं। तुलसी मंत्रों का जाप करने के दौरान भगवान श्रीहरी विष्णु को प्रसाद का भोग जरूर लगाना चाहिए, जिसमें तुलसी की कुछ पत्तियां भी जरूर डालना चाहिए।
तुलसी श्रीर्महालक्ष्मीर्विद्याविद्या यशस्विनी।
धर्म्या धर्मानना देवी देवीदेवमन: प्रिया।।
लभते सुतरां भक्तिमन्ते विष्णुपदं लभेत्।
तुलसी भूर्महालक्ष्मी: पद्मिनी श्रीर्हरप्रिया।।
वृंदा वृंदावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी।
पुष्पसारा नंदनीय तुलसी कृष्ण जीवनी।।
एतभामांष्टक चैव स्त्रोतं नामर्थं संयुतम।
य: पठेत तां च सम्पूज्य सौश्रमेघ फलंलमेता।।
मनः प्रसादजननि सुखसौभाग्यदायिनि।
आधिव्याधिहरे देवि तुलसि त्वां नमाम्यहम्॥
यन्मूले सर्वतीर्थानि यन्मध्ये सर्वदेवताः।
यदग्रे सर्व वेदाश्च तुलसि त्वां नमाम्यहम्॥
अमृतां सर्वकल्याणीं शोकसन्तापनाशिनीम्।
आधिव्याधिहरीं नॄणां तुलसि त्वां नम्राम्यहम्॥
देवैस्त्चं निर्मिता पूर्वं अर्चितासि मुनीश्वरैः।
नमो नमस्ते तुलसि पापं हर हरिप्रिये॥
सौभाग्यं सन्ततिं देवि धनं धान्यं च सर्वदा।
आरोग्यं शोकशमनं कुरु मे माधवप्रिये॥
तुलसी पातु मां नित्यं सर्वापद्भयोऽपि सर्वदा।
कीर्तिताऽपि स्मृता वाऽपि पवित्रयति मानवम्॥
या दृष्टा निखिलाघसङ्घशमनी स्पृष्टा वपुःपावनी
रोगाणामभिवन्दिता निरसनी सिक्ताऽन्तकत्रासिनी।
प्रत्यासत्तिविधायिनी भगवतः कृष्णस्य संरोपिता
न्यस्ता तच्चरणे विमुक्तिफलदा तस्यै तुलस्यै नमः॥
॥ इति श्री तुलसी स्तुति ॥
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