घर के मेन गेट पर नेम प्लेट लगाने से पहले याद रखें ये 5 महत्वपूर्ण नियम, गलत दिशा में लगाने से हो सकती है बड़ी परेशानी
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के मुख्य द्वार पर सही तरीके से लगी नेम प्लेट सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और प्रतिष्ठा लेकर आती है। वास्तु नियमों के अनुसा...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 20 Oct 2026 03:44:27 PM (IST)Updated Date: Tue, 20 Oct 2026 03:44:27 PM (IST)
नेम प्लेट घर में सकारात्मक एनर्जी लाती हैHighLights
- नेम प्लेट घर में सकारात्मक एनर्जी लाती है
- लकड़ी या पत्थर का नेम प्लेट बेहद शुभ
धर्म डेस्क। वास्तु शास्त्र में घर का मुख्य द्वार (Main Door) केवल आने-जाने का रास्ता नहीं, बल्कि घर के भीतर प्रवेश करने वाली सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जाओं का मुख्य केंद्र माना जाता है। इसी मुख्य द्वार पर लगी नेम प्लेट (Name Plate) केवल आपकी पहचान बताने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह आपके घर में सुख, समृद्धि, मान-सम्मान और सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy) को आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
यदि नेम प्लेट सही दिशा, उचित सामग्री और वास्तु के सिद्धांतों के अनुसार लगाई जाए, तो घर के सदस्यों के जीवन में प्रतिष्ठा और सफलता आती है। वहीं, गलत तरीके से या टूटी-फूट स्थिति में लगी नेम प्लेट वास्तु दोष पैदा कर सकती है।
आइए जानते हैं मुख्य द्वार पर नेम प्लेट लगाने से जुड़े 5 प्रमुख वास्तु नियम और टिप्स-
सही दिशा और स्थान का चयन (दही ओर लगाना शुभ)
- शुभ दिशा: वास्तु के अनुसार, पूर्व दिशा (East) और उत्तर दिशा (North) को सकारात्मक ऊर्जा, नव-उत्साह और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। यदि आपका मुख्य द्वार पूर्व या उत्तरमुखी है, तो नेम प्लेट बहुत शुभ फल देती है।
- दरवाजे का दायां हिस्सा: नेम प्लेट को हमेशा मुख्य प्रवेश द्वार के दाहिनी ओर (Right Side) लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसे सीधे दरवाजे के पल्ले के ऊपर बीचों-बीच लगाने के बजाय दरवाजे की बगल वाली दीवार पर लगाना अधिक फलदायी होता है।
प्राकृतिक सामग्री का चुनाव (लकड़ी या पत्थर)
- शुभ सामग्री: वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, नेम प्लेट के लिए लकड़ी (Wood) या प्राकृतिक पत्थर (Marble/Granite) सबसे उत्तम सामग्रियां हैं। लकड़ी में सागौन या शीशम का प्रयोग स्थिरता और सकारात्मकता लाता है।
- धातु का चयन (दिशा अनुसार): यदि मुख्य द्वार उत्तर दिशा में है तो मेटल (ब्रास/स्टील) की नेम प्लेट भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
- प्लास्टिक से बचें: घर के मुख्य द्वार पर प्लास्टिक, ऐक्रेलिक (Acrylic) या फाइबर से बनी नेम प्लेट लगाने से बचना चाहिए, क्योंकि यह वास्तु के अनुसार नकारात्मक ऊर्जा पैदा करती है।
स्पष्ट रोशनी और पीले प्रकाश की व्यवस्था
- पर्याप्त रोशनी: नेम प्लेट हमेशा दिन और रात में आसानी से और स्पष्ट दिखाई देनी चाहिए।
- फोकस लाइट: नेम प्लेट के ऊपर एक छोटा बल्ब या फोकस लाइट (Spotlight) अवश्य लगाना चाहिए।
- हल्की पीली रोशनी (Warm Yellow Light): नेम प्लेट पर पड़ने वाली रोशनी अगर हल्के पीले रंग की हो, तो इसे वास्तु में अत्यंत शुभ और पॉजिटिविटी बढ़ाने वाला माना गया है। अंधेरे में रहने वाली नेम प्लेट घर के विकास में रुकावट लाती है।
देवी-देवताओं की तस्वीर के स्थान पर शुभ प्रतीकों का प्रयोग
- चित्रों से बचें: कई लोग नेम प्लेट पर देवी-देवताओं की तस्वीरें या मूर्तियां बनवा लेते हैं, लेकिन दरवाजे पर बार-बार हाथ लगने, धूल जमने या गंदगी से देवी-देवताओं का अनादर होता है, जो बड़ा वास्तु दोष बनता है।
- शुभ प्रतीक चिन्ह: देवी-देवताओं के चित्र के स्थान पर नेम प्लेट पर 'ॐ' (Om), 'स्वास्तिक' (Swastik), या 'श्री' जैसे पवित्र और शुभ चिन्ह बनवाएं। ये प्रतीक घर के वातावरण को नकारात्मक शक्तियों से बचाते हैं।
नाम लिखने का तरीका और अक्षरों का रंग
- अक्षरों का रंग: नेम प्लेट पर नाम हमेशा सुनहरे/गोल्डन (Golden Color) या ब्रास (Brass) रंग के अक्षरों में लिखवाना चाहिए। गोल्डन रंग समृद्धि, प्रतिष्ठा और सम्मान का प्रतीक माना जाता है।
- सीमित और स्पष्ट शब्द: नेम प्लेट पर बहुत ज्यादा जानकारी न लिखें। केवल घर के मालिक (House Owner) का नाम, मकान नंबर और आवश्यक हो तो उनका पद/पेशा ही स्पष्ट अक्षरों में लिखा होना चाहिए।
- साफ-सफाई और रखरखाव: धुंधले पड़े अक्षर, टूटी-फूटी, दरार वाली या गंदी नेम प्लेट दुर्भाग्य लाती है। समय-समय पर नेम प्लेट की धूल पोंछकर उसे हमेशा चमचमाती और साफ़-सुथरी स्थिति में रखें।