हिंदू धर्म में सभी करोड़ो देवी-देवताओं को पूजा जाता है। हमारे घरों भगवान शिव, गणेश, हनुमान, कृष्ण से लेकर मां दुर्गा की तस्वीर या मूर्ति होती है। लेकिन किसी के भी घर में शनिदेव की फोटो या मूर्ति नहीं रखी जाती है। शास्त्रों के अनुसार शनिदेव सूर्य के पुत्र है। लेकिन इसके बावजूद उनकी पूजा घर में करने पर पाबंदी है। इसके पीछे धार्मिक मान्यता है कि शनिदेव को श्राप मिला था। वह जिसे भी देखेंगे उसका बुरा हो जाएगा। यही कारण है कि शनिदेव की दृष्टि सीधे हमारे जीवन पर ना पड़े। इसलिए उनकी मूर्ति या तस्वीर को घर में रखा जाता है।

शनिदेव की जन्म कथा

हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार सूर्य की पत्नी संज्ञा की परछाई (छाया) के गर्भ से शनि देव जी का जन्म हुआ था। जब शनि छाया के गर्भ में थे तब वह भगवान भोलेनाथ की भक्ति में बेहद मग्न थी। उसे अपने खाने-पीने तक का पता नहीं था। जिसका प्रभाव उसके पुत्र पर पड़ा और उनका रंग काला पड़ गया है। शनिदेव के रंग को देखकर सूर्य ने शनि को अपना पुत्र मानने से इंकार कर दिया। तभी से शनि अपने पिता सूरज से शत्रु भाव रखते हैं। शनि देव ने अपनी साधना तपस्या से शिवजी को प्रसन्न किया। शिवजी ने शनिदेव से वरदान मांगने को कहा, तब उन्होंने सूर्य की तरह शक्ति प्राप्त की। भगवान शंकर ने उन्हें नवग्रहों में सर्वश्रेष्ठ स्थान दिया। वहीं मानव से लेकर देवता भी उनसे भयभीत रहने का वरदान दिया।

ज्योतिष में शनिदेव

ज्योतिष शास्त्रों में शनि के कई नाम है जैसे मन्दगामी, सूर्य पुत्र, शनिश्चर और छायापुत्र आदि। शनि के नक्षत्र पुष्य, अनुराधा और उत्तराभाद्रपद है। यह दो राशी मकर और कुंभ के स्वामी है। नीलम शनि का रत्न है। शनि सूर्य, चंद्र, मंगल के शत्रु, बुध और शुक्र के मित्र और गुरु को सम माने जाते हैं। नवग्रहों के कक्ष क्रम में शनि देव सूर्य से अट्ठासी करोड़ इकसठ लाख मील दूर है।

शनिदेव की पैरों की तरफ देख कर दर्शन

मान्यता है कि शनिदेव के दर्शन के जाते समय उनके पैरों की तरफ देखना चाहिए। उनकी आंखों में डालकर दर्शन नहीं करना चाहिए। घर में शनिदेव की पूजा करना चाहते हैं तो मन में स्मरण करना चाहिए। शनिदेव के साथ हनुमान जी की भी पूजा करनी चाहिए। ऐसा करने से वह प्रसन्न होते हैं। शनिदेव के अलावा नटराज, भैरव, राहु-केतु की फोटो या मूर्ति घर में नहीं रखनी चाहिए।

Posted By: Arvind Dubey

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