इंदौर के आसमान में बरसेंगे अग्निबाण, सजेगा परंपरा का रणक्षेत्र, तुर्रा और कलंगी में होगा हिंगोट युद्ध
शाम ढलते ही आसमान पर आग की लकीरें उभरेंगी। कहीं हिंगोट की चमकती लौ अंधेरे को चीरती दिखाई देगी तो कहीं बारूद की गूंज के बीच परंपरा के रणबांकुरे एक-दूसरे के सामने होंगे।
Publish Date: Sat, 07 Nov 2026 01:46:09 PM (IST)Updated Date: Sat, 07 Nov 2026 01:58:10 PM (IST)
युद्ध के लिए हिंगोट तैयार करते योद्धा। -नईदुनियाHighLights
- गौतमपुरा-रुणजी में दीपावली के अगले दिन होगा हिंगोट युद्ध
- दल के योद्धा अग्निबाणों के साथ मैदान में उतरेंगे
- तुर्रा और कलंगी दल के 150 से 200 योद्धा आमने-सामने होंगे
विशाल राठी, नईदुनिया, गौतमपुरा (इंदौर) : शाम ढलते ही आसमान पर आग की लकीरें उभरेंगी। कहीं हिंगोट की चमकती लौ अंधेरे को चीरती दिखाई देगी तो कहीं बारूद की गूंज के बीच परंपरा के रणबांकुरे एक-दूसरे के सामने होंगे।
यह किसी फिल्म का दृश्य नहीं, बल्कि मालवा की मिट्टी में सदियों से जीवित उस परंपरा का हिस्सा है, जिसे दुनिया हिंगोट युद्ध के नाम से जानती है। इंदौर से करीब 60 किलोमीटर दूर गौतमपुरा और रुणजी में दीपावली के अगले दिन नौ नवंबर को एक बार फिर तुर्रा और कलंगी दल के योद्धा अग्निबाणों के साथ मैदान में उतरेंगे।
'हमारी परंपरा, हमारी धरोहर' के संकल्प के साथ होने वाले इस आयोजन की तैयारियां नवरात्र से ही शुरू हो गई हैं। योद्धा जंगलों से हिंगोरिया वृक्ष के फल जुटाकर उन्हें अग्निबाण का रूप देने में लगे हैं।
पेड़ का फल बनता है अग्निबाण
हिंगोट युद्ध का सबसे खास हिस्सा है इसका अस्त्र। हिंगोट दरअसल हिंगोरिया नामक वृक्ष का फल होता है। युवा योद्धा आदर्श बैरागी, पिंटू कुमावत, राहुल माली, दीपक ठाकुर और कपिल योगी बताते हैं कि जंगल से लाए गए फलों को पहले सुखाया जाता है। फिर उनके भीतर का हिस्सा निकालकर खोखला किया जाता है। पारंपरिक रूप से इनमें बारूद और बत्ती भरी जाती है। छिद्र को पीली मिट्टी से बंद किया जाता है। उड़ान की दिशा तय करने के लिए इसके साथ बांस की किमची बांधी जाती है। इस तरह तैयार हिंगोट युद्ध में अग्निबाण के रूप में इस्तेमाल होता है।
राजीव गांधी के सामने भी दिखाया था युद्ध
इस परंपरा की उम्र कितनी पुरानी है, इसका लिखित इतिहास भले स्पष्ट न हो, लेकिन नगर के बुजुर्ग इसे सदियों से चला आ रहा आयोजन बताते हैं। वर्ष 1984 में दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित मालवा कला उत्सव में गौतमपुरा-रुणजी के योद्धाओं ने तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के सामने भी हिंगोट युद्ध का प्रदर्शन किया था।
जालियों के पीछे रहेंगे दर्शक
हिंगोट की चपेट में आने से योद्धाओं और कभी-कभी दर्शकों के चोटिल होने की घटनाएं भी होती हैं। इसलिए प्रशासन और पुलिस सुरक्षा के व्यापक इंतजाम करते हैं। इस बार भी 150 से 200 योद्धाओं के शामिल होने की संभावना है। मैदान में दर्शकों की सुरक्षा के लिए बड़ी-बड़ी जालियां लगाई जाएंगी। एंबुलेंस, दमकल वाहन, पानी के टैंकर, विद्युत रोशनी और सुरक्षाबल तैनात रहेंगे।