
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। चार माह के विराम के बाद देवउठनी एकादशी से एक बार फिर शहनाइयां गूंजने लगेंगी। 20 नवंबर को देवउठनी एकादशी के साथ विवाह सहित अन्य मांगलिक कार्यों की शुरुआत होगी। इसे देखते हुए शहर के मैरिज गार्डन, होटल और रिसोर्ट में तैयारियां शुरू हो गई हैं।
हालांकि सहलग का यह सिलसिला अधिक लंबा नहीं चलेगा। महज 22 दिन बाद 16 दिसंबर से खरमास शुरू होने के कारण विवाह आयोजनों पर फिर एक माह का विराम लग जाएगा। 14 जनवरी को मकर संक्रांति के बाद दोबारा विवाह समारोह शुरू होंगे।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार नवंबर और दिसंबर में विवाह के लिए कुल नौ शुभ मुहूर्त और देव उठनी एकादशी अबूझ मुहूर्त उपलब्ध हैं। नवंबर में 21, 24, 25 और 30 तारीख को विवाह के शुभ योग बन रहे हैं।
इनमें 21 नवंबर को तुलसी विवाह का विशेष संयोग है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन को अबूझ मुहूर्त माना जाता है। यही वजह है कि इस दिन बड़ी संख्या में विवाह होने की संभावना है।
दिसंबर में 2, 3, 9, 11 और 12 तारीख विवाह के लिए शुभ रहेंगी। इसके बाद 16 दिसंबर को सूर्य के धनु राशि में प्रवेश के साथ खरमास प्रारंभ हो जाएगा। सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार खरमास में विवाह, गृह प्रवेश सहित अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं।
देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु के योगनिद्रा से जागने के साथ ही चातुर्मास समाप्त हो जाता है और मांगलिक कार्यों का सिलसिला शुरू होता है। सीमित शुभ मुहूर्त होने के कारण नवंबर-दिसंबर में मैरिज गार्डन, होटल, कैटरिंग और विवाह आयोजनों से जुड़े कारोबार में तेजी आने की उम्मीद है।