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पांच मई को अंगारकी चतुर्थी, उज्जैन में मंगल दोष निवारण के लिए होगी महामंगल की पूजा

5 मई मंगलवार को ज्येष्ठ मास कृष्ण पक्ष की संकष्टी चतुर्थी 'अंगारकी चतुर्थी' के रूप में मनाई जाएगी।

By Digital DeskEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Sun, 03 May 2026 12:50:57 PM (IST)Updated Date: Sun, 03 May 2026 12:59:19 PM (IST)
पांच मई को अंगारकी चतुर्थी, उज्जैन में मंगल दोष निवारण के लिए होगी महामंगल की पूजा
भगवान अंगारेश्वर महादेव।

HighLights

  1. मंगलवार को चतुर्थी, बना अंगारकी का विशेष संयोग
  2. रात 10:28 बजे चंद्रोदय, चंद्रमा बदलेगा राशि
  3. अंगारेश्वर महादेव का गुलाल श्रृंगार, भातपूजा होगी

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की संकष्टी चतुर्थी 5 मई को मंगलवार के दिन आ रही है। मंगलवार के दिन चतुर्थी होने से यह अंगारकी चतुर्थी कहलाएगी। इस दिन भगवान गणेश व चौथ माता के साथ महामंगल तथा पृथ्वी माता के पूजन का विधान है। धर्मशास्त्र के जानकारों के अनुसार अंगारकी चतुर्थी पर महामंगल की पूजा से विवाह आदि मांगलिक कार्य, आर्थिक प्रगति तथा नौकरी व व्यापार में आ रही बाधा से मुक्ति मिलती है।

ज्योतिषाचार्य पं. अमर डब्बावाला ने बताया 12 माह में ज्येष्ठ मास को बड़ा माना जाता है। इस बार ज्येष्ठ अधिकमास भी है। इसके प्रथम शुद्ध पक्ष में 5 मई मंगलवार को अंगारकी चतुर्थी का संयोग बन रहा है। इस दिन भगवान गणेश, चौथ माता के साथ भुवनेश्वरी देवी तथा मंगल ग्रह के पूजन की मान्यता है। जिन जातकों की जन्म कुंडली में मांगलिक प्रभाव हो या मंगल की स्थिति हो उनके लिए मंगल की विशेष साधना का यह खास दिन है। इस दिन यथा विधि मंगल का पूजन करना चाहिए या ऋण मोचक मंगल स्तोत्र अथवा अंगारक स्तोत्र का पाठ करना चाहिए।


रात्रि 10.28 बजे होगा चंद्रोदय

पं. डब्बावाला ने बताया अंगारकी चतुर्थी पर रात 10 बजकर 28 मिनट पर चंद्रोदय होगा। सौभाग्यवती स्त्रियां शाम को भगवान गणेश व चौथ माता का पूजन करेंगी। इसके बाद कथा का श्रवण करेंगी। चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य प्रदान कर पूजा अर्चना की जाएगी। इसके बाद व्रत का पारणा होगा।

चतुर्थी पर चंद्रमा आधे दिन वृश्चिक राशि में रहेगा। इसके बाद धनु राशि में प्रवेश करेगा। ऐसे में विशिष्ट पद की प्राप्ति के लिए सुबह व शाम अपने इष्ट की विशेष आराधना की जा सकती है। अंगारेश्वर महादेव का गुलाल श्रृंगार होगा उज्जैन को मंगल ग्रह का जन्म स्थान माना गया है। यहां मंगलनाथ व श्री अंगारेश्वर महादेव मंदिर में मंगल ग्रह की साक्षी मानी गई है।

देशभर से भक्त इन मंदिरों में मंगल भात पूजा करने आते हैं। श्री अंगारेश्वर मंदिर के पुजारी पं. रोहित उपाध्याय ने बताया अंगारकी चतुर्थी पर भगवान अंगारेश्वर का जलाभिषेक, पंचामृत पूजन, गन्ने के रस से अभिषेक तथा भातपूजा करने से बाधाओं का निवारण तथा समस्त सुखों की प्राप्ति होती है। इस दिन संध्याकाल भगवान का गुलाल शृंगार किया जाएगा।

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